Submarine Stealth Capability : नई दिल्ली (07 मार्च 2026): भारतीय नौसेना जल्द ही अपनी पनडुब्बियों में स्वदेशी एयर-इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) सिस्टम को एकीकृत करने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह अत्याधुनिक तकनीक पुणे स्थित ‘नेवल मटेरियल्स रिसर्च लेबोरेटरी’ (NMRL) द्वारा विकसित की गई है। यह सिस्टम मुख्य रूप से डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों की उस बड़ी सीमा को खत्म करेगा, जिसके कारण उन्हें बैटरी चार्ज करने के लिए बार-बार सतह पर आना पड़ता था।
AIP तकनीक क्या है और क्यों है खास? सामान्य डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों को बैटरी चार्ज करने के लिए हर कुछ दिनों में सतह पर आना पड़ता है, जिससे दुश्मन के रडार या एंटी-सबमरीन सिस्टम द्वारा उनके पकड़े जाने का खतरा बना रहता है। AIP तकनीक इस जोखिम को खत्म करती है। यह सिस्टम फॉस्फोरिक एसिड फ्यूल-सेल पर आधारित है, जो पनडुब्बी के भीतर ही हाइड्रोजन तैयार कर स्वच्छ ऊर्जा उत्पन्न करता है। इस प्रक्रिया में कोई धुआं या प्रदूषण नहीं होता और यह पनडुब्बी को कम गति पर लगभग 13 से 21 दिनों तक लगातार पानी के भीतर रहने में सक्षम बनाता है।
INS खंडेरी का अपग्रेड शेड्यूल योजना के अनुसार, अगले 3-4 महीनों में AIP का एनर्जी मॉड्यूल मझगांव डॉक शिपयार्ड लिमिटेड (MDL) को सौंप दिया जाएगा। जब INS खंडेरी अपने रूटीन अपग्रेड और ओवरहॉल के लिए डॉकयार्ड में जाएगी, तब इसे इसमें फिट किया जाएगा। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, इसके समुद्री परीक्षण (Sea Trials) जुलाई-अगस्त 2027 में शुरू होने की उम्मीद है, जबकि 2028 की शुरुआत तक यह पूर्णतः ऑपरेशनल हो जाएगी।
रणनीतिक महत्व और आत्मनिर्भरता यह तकनीक भारत को उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल कर देगी, जिनके पास अपनी खुद की विकसित AIP तकनीक है। यह न केवल भारतीय नौसेना की ‘स्टेल्थ’ (छिपकर कार्य करने) की क्षमता को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी, बल्कि विदेशी तकनीक पर निर्भरता को कम करके ‘आत्मनिर्भर भारत’ के सपने को भी मजबूती प्रदान करेगी। यह तकनीक हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की निगरानी और सुरक्षा स्थिति को और अधिक प्रभावी बनाएगी।











