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CGPSC Boiler Inspector Controversy 2026 : छत्तीसगढ़ PSC भर्ती विवाद: बायलर इंस्पेक्टर पद पर चयन को लेकर भाजपा नेता के तीखे आरोप; आयोग ने कहा- प्रक्रिया पूरी तरह वैध

CGPSC Boiler Inspector Controversy 2026 : रायपुर (03 मार्च 2026): छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (PSC) द्वारा आयोजित ‘निरीक्षक वाष्पयंत्र परीक्षा-2024’ के परिणाम घोषित होते ही प्रदेश में एक नया राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा नेता गौरीशंकर श्रीवास ने इस भर्ती प्रक्रिया में धांधली का आरोप लगाते हुए राज्यपाल को पत्र लिखा है। उन्होंने चयनित अभ्यर्थी कानन वर्मा की पात्रता और आयोग के तीन सदस्यों—प्रवीण वर्मा, संत कुमार पासवान और सरिता उइके—की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

क्या हैं मुख्य आरोप? गौरीशंकर श्रीवास का दावा है कि चयनित अभ्यर्थी निर्धारित अधिकतम आयु सीमा को पार कर चुके थे, फिर भी उन्हें नियमों की अनदेखी कर पात्र माना गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आयोग के सदस्यों और चयनित अभ्यर्थी के बीच साठगांठ है। श्रीवास ने पत्र में उल्लेख किया कि इस मामले में साकेत अग्रवाल नामक अभ्यर्थी ने हाई कोर्ट में याचिका लगाई थी, जिसमें न्यायालय ने उनके पक्ष में आदेश दिया था, लेकिन इसके बावजूद चयन प्रक्रिया को दूषित किया गया। उन्होंने मांग की है कि संबंधित सदस्यों को पद से हटाकर मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए।

PSC का आधिकारिक स्पष्टीकरण विवाद बढ़ता देख छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने 3 मार्च 2026 को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर अपना पक्ष रखा। आयोग ने स्पष्ट किया कि:

  • बायलर इंस्पेक्टर पद सहित सभी चयन प्रक्रियाएं प्रचलित नियमों और विज्ञापनों के अनुरूप पारदर्शी ढंग से की गई हैं।

  • आयु सीमा का निर्धारण: दस्तावेज सत्यापन (Document Verification) के समय शासन के नियमों के आधार पर ही पात्रता तय की गई है।

  • रिश्तेदारी का खंडन: आयोग ने कड़े शब्दों में कहा कि चयनित अभ्यर्थी किसी भी सदस्य के रिश्तेदार नहीं हैं और ऐसे आरोप ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ हैं।

  • न्यायालय का सम्मान: आयोग ने आश्वस्त किया कि हाई कोर्ट के आदेशों के अनुरूप आगामी वैधानिक कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।

भविष्य की स्थिति फिलहाल यह मामला कानूनी और राजनीतिक मोर्चे पर उलझ गया है। यदि हाई कोर्ट का आदेश किसी अन्य अभ्यर्थी के पक्ष में स्पष्ट है, तो PSC और संबंधित विभाग को अपनी चयन सूची में बदलाव करना पड़ सकता है। वहीं, भाजपा नेता द्वारा लगाए गए ‘भाई-भतीजावाद’ के आरोपों ने एक बार फिर आयोग की विश्वसनीयता को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब सभी की नजरें राजभवन की अगली कार्यवाही और न्यायालय के अंतिम रुख पर टिकी हैं।

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