Shiv Parvati Holi Shipra Bank : उज्जैन (02 मार्च 2026): बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में होली का पर्व बेहद खास और पारंपरिक अंदाज में मनाया जा रहा है। सोमवार को शिप्रा नदी के पावन तट पर स्थित महाकाल वन में शिव-भक्ति और रंगों का ऐसा समां बंधा कि हर कोई शिवमय हो गया। यहाँ महाकाल मंदिर शयन आरती भक्ति मंडल द्वारा आयोजित ‘महाकाल वन होली’ में भगवान शिव, माता पार्वती और उनके गणों (भूत-पिशाच व नंदी) ने प्रतीकात्मक रूप धारण कर भक्तों के साथ अबीर-गुलाल और फूलों की होली खेली।
शिव की सेना और भक्ति का जुलूस आयोजन की शुरुआत एक भव्य जुलूस के साथ हुई, जिसमें शिव के गणों के रूप में सजे भक्त अद्भुत वेशभूषा में नाचते-गाते पहुँचे। ढोल-नगाड़ों की थाप पर झूमते इन ‘भूत-पिशाचों’ को देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो साक्षात भोलेनाथ की बारात होली खेलने निकली हो। इस दौरान महिला श्रद्धालुओं ने शिव-पार्वती के साथ बैठकर भजन गायन किया और एक-दूसरे को गुलाल लगाकर पर्व की बधाई दी।
परंपराओं का निर्वहन: चौसर और भांग की मस्ती उज्जैन में शिव और शक्ति (माता हरसिद्धि) दोनों का वास है, इसलिए यहाँ होली का महत्व दोगुना हो जाता है। इस विशेष आयोजन में पुरानी परंपराओं को जीवित रखते हुए भक्त जहाँ एक ओर चौसर खेलते नजर आए, वहीं दूसरी ओर महादेव के प्रिय प्रसाद ‘भांग’ को घोटने और वितरण का दौर भी चला। फूलों की पंखुड़ियों से पूरा परिसर महक उठा और शयन आरती मंडल के सदस्यों ने भक्ति भाव से इस उत्सव को संपन्न कराया।
देवलोक जैसा अहसास जब शिव-पार्वती के रूप में सजे कलाकारों ने नृत्य करना शुरू किया, तो श्रद्धालु स्वयं को रोक नहीं पाए और उनके साथ थिरकने लगे। स्थानीय लोगों का कहना है कि महाकाल वन में होने वाला यह आयोजन केवल रंगों का त्यौहार नहीं, बल्कि महादेव के प्रति अटूट प्रेम और समर्पण का प्रतीक है।











