Nationwide Industrial Strike Feb 12 : केंद्र सरकार की कथित मजदूर-विरोधी और निजीकरण समर्थक नीतियों के खिलाफ देश के प्रमुख ट्रेड यूनियनों ने मोर्चा खोल दिया है। 12 फरवरी को आयोजित होने वाली एक दिवसीय ‘देशव्यापी औद्योगिक हड़ताल’ को सफल बनाने के लिए मजदूर संगठनों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।
प्रमुख संगठनों ने की संयुक्त प्रेस वार्ता
एसकेएमएस (एटक) के महासचिव अजय विश्वकर्मा, एचएमएस नेता नाथूलाल पांडेय, एससीकेएमसी (इंटक) नेता गोपाल नारायण सिंह और सीटू के महासचिव व्ही.एम. मनोहर ने एक संयुक्त प्रेस वार्ता को संबोधित किया। नेताओं ने बताया कि यह हड़ताल केवल उद्योगों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे संयुक्त किसान मोर्चा, खेतिहर मजदूर संगठनों और विपक्षी दलों का भी पूरा समर्थन प्राप्त है।
इन मुद्दों पर है श्रमिक संगठनों का विरोध
श्रमिक नेताओं ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए निम्नलिखित मुद्दों को हड़ताल का मुख्य कारण बताया:
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चार श्रम संहिताएं (Labour Codes): बिना व्यापक चर्चा के लागू किए जा रहे नए लेबर कोड से मजदूरों के अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा पर खतरा।
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अधिकारों में कटौती: वेतन संरचना, पेंशन, पीएफ, ग्रेच्युटी और सामूहिक सौदेबाजी की क्षमता प्रभावित होने का डर।
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निजीकरण: सार्वजनिक उपक्रमों के अंधाधुंध निजीकरण और फिक्स्ड टर्म रोजगार के खिलाफ आक्रोश।
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कार्य घंटे: कार्य के घंटों को बढ़ाने और श्रम संस्थाओं की शक्तियों में कटौती का विरोध।
SECL में हड़ताल को सफल बनाने की रणनीति
एसईसीएल के कोयला अंचलों में हड़ताल का व्यापक असर सुनिश्चित करने के लिए सोहागपुर, बैकुंठपुर और दीपका क्षेत्रों में संयुक्त सम्मेलन आयोजित किए गए। रायगढ़ से लेकर जोहिला क्षेत्र तक के यूनिट स्तर के नेताओं ने इस आंदोलन में हिस्सा लिया है। संयुक्त मोर्चा द्वारा लगातार गेट मीटिंग और पल्ली बैठकें कर कामगारों से एकजुट होने की अपील की जा रही है।
निष्कर्ष: श्रमिक नेताओं का दावा है कि 12 फरवरी की यह हड़ताल ऐतिहासिक होगी और सरकार को अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर करेगी।











