Gharghoda Raigarh News : गौरी शंकर गुप्ता/घरघोड़ा : घरघोड़ा नगर में यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। नगर के प्रवेश द्वारों पर “भारी वाहन प्रतिबंधित” के बड़े-बड़े बोर्ड तो लगे हैं, लेकिन हकीकत में ये बोर्ड केवल शोभा की वस्तु बनकर रह गए हैं। प्रशासनिक अनदेखी का आलम यह है कि शहर के बीचों-बीच से सुबह 4 बजे से ही भारी वाहनों (ट्रक, टेलर, डंपर) का रेला शुरू हो जाता है, जबकि इनके लिए बाकायदा करोड़ों की लागत से बाईपास रोड बनाया गया है।
नींद में शहर, सड़कों पर कहर
जब नगर की जनता सो रही होती है, तब भारी वाहन किसी ‘वीआईपी’ की तरह शहर की मुख्य सड़कों पर दौड़ रहे होते हैं। सुबह की सैर पर निकलने वाले बुजुर्गों और स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए ये डंपर साक्षात ‘काल’ बनकर गुजरते हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इन वाहनों की गड़गड़ाहट से न केवल सड़कें कांपती हैं, बल्कि मकानों की दीवारों में भी दरारें आने का डर बना रहता है।
बाईपास का उपयोग क्यों नहीं?
शासन ने लाखों-करोड़ों खर्च कर भारी वाहनों के लिए घुमावदार बाईपास मार्ग का निर्माण किया ताकि नगर सुरक्षित रहे। लेकिन सवाल यह उठता है कि जब शहर के अंदर से निकलने पर कोई रोक-टोक या जुर्माना नहीं है, तो ट्रक चालक लंबा रास्ता क्यों चुनें? प्रशासन की सुस्ती ने इन चालकों को नियम तोड़ने का खुला निमंत्रण दे दिया है।
पुलिस और प्रशासन पर उठते सवाल
स्थानीय नागरिकों में भारी रोष है। लोगों का पूछना है कि:
- क्या पुलिस प्रशासन केवल छोटे वाहन चालकों के चालान काटने के लिए है?
- क्या इन भारी वाहनों को किसी का मूक संरक्षण प्राप्त है?
- क्या नियम केवल कागजों पर ही मुस्कुराते रहेंगे?









