Yumnam Khemchand Singh CM Manipur : इंफाल (4 फरवरी 2026)। मणिपुर में पिछले 356 दिनों से लागू राष्ट्रपति शासन आज समाप्त हो गया। बुधवार शाम को राजभवन में आयोजित एक सादे समारोह में राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने भाजपा विधायक युमनाम खेमचंद सिंह को राज्य के 13वें मुख्यमंत्री के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।
संतुलन साधने की कोशिश: दो उपमुख्यमंत्री
राज्य की जातीय विविधता और शांति बहाली को ध्यान में रखते हुए एनडीए ने दो डिप्टी सीएम बनाए हैं:
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नेमचा किपगेन: कुकी समुदाय से आने वाली नेमचा ने दिल्ली स्थित मणिपुर भवन से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए शपथ ली। वे मणिपुर के इतिहास में पहली महिला डिप्टी सीएम बनी हैं।
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लोसी दिखो: नगा समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले नगा पीपुल्स फ्रंट (NPF) के विधायक लोसी दिखो को भी उपमुख्यमंत्री बनाया गया है।
क्यों चुने गए युमनाम खेमचंद सिंह?
खेमचंद को पूर्व सीएम एन. बीरेन सिंह का करीबी माना जाता है, लेकिन उनकी छवि ‘नरमपंथी’ नेता की है।
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वे 2017-2022 तक विधानसभा स्पीकर रहे और बीरेन सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे।
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मई 2023 की हिंसा के बाद, वे पहले ऐसे मैतेई नेता थे जिन्होंने दिसंबर 2025 में कुकी बहुल इलाकों और रिलीफ कैंपों का दौरा किया। उनकी इसी ‘मध्यमार्गी’ छवि के कारण उन्हें शांति बहाली के लिए उपयुक्त माना गया है।
राष्ट्रपति शासन का अंत
मणिपुर में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच भड़की भीषण जातीय हिंसा के बाद 13 फरवरी 2025 को राष्ट्रपति शासन लगाया गया था। हिंसा के चलते तत्कालीन सीएम एन. बीरेन सिंह ने 9 फरवरी 2025 को इस्तीफा दे दिया था। आज राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अनुच्छेद 356 हटाकर नई सरकार के गठन का मार्ग प्रशस्त किया।
मणिपुर विधानसभा का गणित
60 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा का पलड़ा भारी है:
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भाजपा: 37 विधायक (32 मूल + 5 JDU से आए)
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सहयोगी: NPP (6), NPF (5) और अन्य निर्दलीय। वर्तमान सरकार का कार्यकाल 2027 तक है।
नई सरकार के सामने चुनौतियां
मुख्यमंत्री खेमचंद के सामने सबसे बड़ी चुनौती राज्य में कुकी और मैतेई समुदाय के बीच विश्वास बहाली करना है। हिंसा के तीन मुख्य कारण— मैतेई को ST दर्जा, अलग कुकी प्रशासन की मांग और ड्रग्स तस्करी के आरोप— अभी भी सुलझने बाकी हैं।











