UPI Charges : जल्द ही ‘स्कैन-पे’ भी देगा टेंशन! क्या बजट 2026 से UPI यूजर्स की जेब पर पड़ेगा डाका

Rahul Goshwami

निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : अगर आप भी रोज़ सुबह चाय वाले को QR कोड स्कैन कर पेमेंट करते हैं और सब्ज़ी, किराना, दवा से लेकर ऑनलाइन शॉपिंग तक हर जगह UPI का इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपके लिए अहम है। अब तक जिसे सबसे आसान और मुफ्त डिजिटल पेमेंट का जरिया माना जाता था, वही UPI सिस्टम बजट 2026 के बाद महंगा हो सकता है। UPI पर चार्ज लगने की चर्चा ने करोड़ों यूजर्स की चिंता बढ़ा दी है।

UPI चार्ज को लेकर क्यों तेज हुई चर्चा

भारत में डिजिटल भुगतान की रीढ़ बन चुका यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) आज हर महीने अरबों लेनदेन संभाल रहा है। पेमेंट कंपनियों और बैंकों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर ट्रांजेक्शन को बिना किसी शुल्क के चलाना अब आर्थिक रूप से मुश्किल होता जा रहा है। सिस्टम को बनाए रखने, तकनीकी अपग्रेड और साइबर सुरक्षा पर भारी खर्च आ रहा है।

Budget 2026 से पहले सरकार के सामने रखी गई मांगें

फरवरी 2026 में पेश होने वाले केंद्रीय बजट से पहले पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) और बड़ी फिनटेक कंपनियों ने वित्त मंत्रालय के सामने दो प्रमुख मांगें रखी हैं।

  • UPI ट्रांजेक्शन के लिए मिलने वाली सरकारी सब्सिडी में बड़ी बढ़ोतरी

  • मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को दोबारा लागू करना

अभी क्या है मौजूदा सिस्टम

फिलहाल UPI ट्रांजेक्शन पर न तो ग्राहक से और न ही दुकानदार से कोई शुल्क लिया जाता है। इसके बदले सरकार पेमेंट कंपनियों को सब्सिडी देती है। साल 2025 में करीब 1,500 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी गई थी, जबकि इंडस्ट्री का कहना है कि वास्तविक जरूरत 5,000 से 6,000 करोड़ रुपये की है।

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MDR की वापसी से क्या बदलेगा

पेमेंट कंपनियों ने सुझाव दिया है कि जिन व्यापारियों का सालाना टर्नओवर 40 लाख रुपये से ज्यादा है, उन पर 0.30% MDR लगाया जाए। साथ ही RuPay डेबिट कार्ड पर भी अन्य डेबिट कार्ड की तरह चार्ज लगाने की मांग की गई है।

आम ग्राहकों पर क्या होगा असर

अगर MDR लागू होता है तो इसका सीधा असर दुकानदारों पर पड़ेगा। ऐसे में व्यापारी या तो सामान की कीमत बढ़ा सकते हैं या फिर ग्राहकों से अतिरिक्त शुल्क वसूल सकते हैं।

कंपनियां बदलाव को क्यों बता रही हैं जरूरी

फिनटेक एक्सपर्ट्स का मानना है कि UPI को गांव-गांव तक पहुंचाने और नई टेक्नोलॉजी विकसित करने के लिए कंपनियों के पास पर्याप्त फंड होना जरूरी है। जीरो MDR मॉडल लंबे समय तक टिकाऊ नहीं माना जा रहा, खासकर तब जब UPI हर महीने 21.5 अरब से ज्यादा ट्रांजेक्शन संभाल रहा हो।अब सबकी नजरें वित्त मंत्री के बजट 2026 भाषण पर टिकी हैं।

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