निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच लंबे समय से लंबित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को आखिरकार अंतिम रूप दे दिया गया है। इस समझौते के तहत यूरोप में निर्मित कारों पर भारत में लगने वाला आयात शुल्क 110 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत किया जाएगा। हालांकि यह राहत हर साल अधिकतम 2.5 लाख गाड़ियों की तय सीमा के भीतर ही लागू होगी। करीब 20 वर्षों की बातचीत के बाद यह डील दोनों पक्षों के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
समझौते के मुताबिक, यूरोपीय कारों पर टैरिफ को चरणबद्ध तरीके से कम किया जाएगा। अभी भारत में 40,000 डॉलर (करीब ₹36.7 लाख) से कम कीमत वाली इम्पोर्टेड पैसेंजर कारों पर लगभग 70 प्रतिशत बेसिक कस्टम ड्यूटी लगती है, जबकि इससे महंगी कारों पर कुल मिलाकर 110 प्रतिशत तक टैक्स देना पड़ता है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद यह बोझ काफी हद तक कम हो जाएगा।
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डील की प्रमुख शर्तें और नियम
इस ट्रेड डील के तहत सभी कारों को समान छूट नहीं मिलेगी।
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25 लाख रुपये से अधिक कीमत वाली कारों पर ही टैरिफ कट का लाभ मिलेगा
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हर साल 2.5 लाख यूनिट तक ही रियायती शुल्क लागू होगा
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भारत जितना कोटा EU कारों को देगा, उसके बदले EU भारत को ढाई गुना ज्यादा अवसर देगा
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केवल पैसेंजर कार ही नहीं, बल्कि ट्रक इम्पोर्ट पर भी कोटा आधारित छूट दी जाएगी
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महंगी और प्रीमियम कारों के लिए कोटा ज्यादा रखा गया है
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EV, पेट्रोल और डीजल सभी सेगमेंट में 25 लाख रुपये की न्यूनतम सीमा तय की गई है
इसका मतलब साफ है कि सस्ती इम्पोर्टेड कारों को ड्यूटी में कटौती का फायदा नहीं मिलेगा।
इन यूरोपीय कंपनियों की कारें होंगी ज्यादा किफायती
FTA लागू होने के बाद यूरोपीय संघ में बनी कारों पर टैरिफ घटकर लगभग 10 प्रतिशत तक आ जाएगा। इससे भारत में Volkswagen, BMW, Mercedes-Benz, Audi, Porsche, Maserati, Skoda और Volvo जैसी कंपनियों को बड़ा फायदा मिलेगा। खासकर जर्मनी की प्रमुख ऑटो कंपनियों के कई लग्ज़री और हाई-परफॉर्मेंस मॉडल अब पहले के मुकाबले कम कीमत में उपलब्ध हो सकते हैं।
भारत-EU व्यापार को मिलेगा नया आयाम
वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और यूरोपीय संघ के बीच कुल व्यापार 190 अरब डॉलर के पार पहुंच गया। भारत ने EU को 75.9 अरब डॉलर का सामान और 30 अरब डॉलर की सेवाएं निर्यात कीं, जबकि EU से भारत को 60.7 अरब डॉलर का सामान और 23 अरब डॉलर की सेवाएं मिलीं।
कार बाजार की बात करें तो भारत, अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल बाजार है। इसके बावजूद घरेलू ऑटो इंडस्ट्री को अब तक ऊंचे आयात शुल्क के जरिए सुरक्षित रखा गया था। इन भारी टैरिफ की आलोचना कई वैश्विक उद्योगपतियों ने की है, जिनमें टेस्ला के CEO एलन मस्क भी शामिल हैं।









