रायगढ़ : रायगढ़ जिले के तेंदू डीपा (देवार पारा) में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान श्रद्धा, भक्ति और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। आंचल के प्रसिद्ध कथावाचक श्री श्री भारत भूषण शास्त्री जी ने अपनी ओजस्वी वाणी से भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं और नंद उत्सव का ऐसा सजीव वर्णन किया कि पूरा पंडाल भक्ति रस में डूब गया। यह आयोजन माघ कृष्ण पक्ष त्रयोदशी, शुक्रवार को संपन्न हुआ।
वृंदावन परंपरा से जुड़ी ओजस्वी कथा वाणी
अत्रि निकेतन आश्रम, वृंदावन धाम (ब्रज मंडल) में परम पूज्य गुरुवर श्री श्री ताराचंद जी शास्त्री के सानिध्य में 18 ग्रंथों का विधिवत अध्ययन कर चुके श्री भारत भूषण शास्त्री जी आज न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि देश के कई राज्यों में एक प्रख्यात कथावाचक के रूप में पहचान बना चुके हैं। उनकी कथा शैली में शास्त्र, भाव और भक्तिरस का सुंदर समन्वय देखने को मिला।
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पुतना वध से दावानल उद्धार तक लीलाओं का सजीव चित्रण
कथा के दौरान श्री शास्त्री जी ने श्रीकृष्ण के गोकुल आगमन के पश्चात नंद बाबा द्वारा आयोजित नंद उत्सव की पृष्ठभूमि को विस्तार से प्रस्तुत किया। इससे पहले पुतना वध, अघासुर, बकासुर, वृतासुर और दावानल उद्धार जैसी लीलाओं का अत्यंत भावपूर्ण और जीवंत वर्णन किया गया। कथा सुनते हुए श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर बालकृष्ण की अलौकिक शक्तियों और करुणा का अनुभव करते नजर आए।
नंद उत्सव में बदला तेंदू डीपा नंदगांव में
जैसे ही नंद उत्सव की कथा प्रारंभ हुई, पूरा तेंदू डीपा देवार पारा मानो नंदगांव में परिवर्तित हो गया। कथा के यजमान श्री सुदेश लाला एवं श्रीमती चंद्रकांता लाला, मोनी जयलाल, समीर गुप्ता, सोनू गुप्ता और रामा जयसवाल सहित पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु अपने स्थान पर खड़े होकर नृत्य करने लगे। बालकृष्ण को सखाओं संग मटकी फोड़ते देखने का भावपूर्ण आनंद हर चेहरे पर झलक रहा था।











