CG NEWS : धान गायब होने के आरोपों पर सरकार का स्पष्टीकरण, भंडारण में सूखत को बताया स्वाभाविक और तकनीकी प्रक्रिया

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CG NEWS : रायपुर। छत्तीसगढ़ में करोड़ों रुपये के धान गायब होने के आरोपों के बीच राज्य सरकार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए इन दावों को भ्रामक बताया है। सरकार का कहना है कि धान खरीदी और भंडारण के दौरान नमी में कमी के कारण वजन में आंशिक गिरावट होना एक स्वाभाविक और तकनीकी प्रक्रिया है, जिसे सूखत कहा जाता है। कुछ स्थानों पर इसे लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है, जबकि वास्तविकता इससे अलग है।

CG NEWS : सरकार के अनुसार धान के भंडारण के दौरान नमी, तापमान, परिवहन और भंडारण अवधि के प्रभाव से वजन में स्वाभाविक कमी आती है। इसे वैज्ञानिक रूप से मॉइस्चर लॉस या ड्रायिंग लॉस कहा जाता है, जो वर्षों से चली आ रही प्रक्रिया है और देश के सभी धान उत्पादक राज्यों में देखने को मिलती है। इसे पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता, लेकिन नियंत्रित और पारदर्शी तरीके से प्रबंधित किया जा सकता है।

CG NEWS : सरकारी आंकड़ों के मुताबिक खरीफ विपणन वर्ष 2019-20 में 6.32 प्रतिशत और 2020-21 में 4.17 प्रतिशत सूखत दर्ज की गई थी। वहीं खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में लगभग 3.49 प्रतिशत सूखत की संभावना जताई गई है, जो पिछले वर्षों के औसत के अनुरूप है और असामान्य नहीं मानी जा रही है।

CG NEWS : राज्य सरकार ने बताया कि वर्तमान धान खरीदी व्यवस्था में डिजिटल स्टॉक एंट्री, वजन सत्यापन, गुणवत्ता परीक्षण, गोदाम ट्रैकिंग, परिवहन और उठाव की निगरानी जैसी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं। इससे हर स्तर पर अनियमितताओं की पहचान संभव हो पाई है। सूखत को अब अनुमान के बजाय डेटा आधारित और ट्रैक करने योग्य प्रक्रिया बनाया गया है, ताकि जहां यह सामान्य सीमा में हो उसे स्वीकार किया जा सके और जहां असामान्य रूप से अधिक हो, वहां जांच और जिम्मेदारी तय की जा सके।

CG NEWS : सरकार का कहना है कि धान खरीदी प्रणाली का मुख्य उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का पूरा और न्यायसंगत मूल्य दिलाना, भंडारण में पारदर्शिता बनाए रखना और पूरी प्रक्रिया को भरोसेमंद बनाना है। डिजिटल टोकन, ऑनलाइन भुगतान, स्टॉक ट्रैकिंग और शिकायत निवारण जैसी सुविधाओं के चलते प्रदेश की धान खरीदी व्यवस्था अब देश की सबसे संगठित और निगरानी आधारित प्रणालियों में शामिल हो चुकी है। सरकार ने दोहराया कि सूखत भंडारण की एक वैज्ञानिक वास्तविकता है, जिसे अब पूरी पारदर्शिता, निगरानी और नियंत्रण के साथ संचालित किया जा रहा है।

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