नई दिल्ली : सोमवार को जेएनयू कैंपस में सुप्रीम कोर्ट द्वारा उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन सबरमती हॉस्टल के बाहर आयोजित किया गया, जिसमें जेएनयू छात्र संघ (JNUSU) के नेता और वामपंथी संगठन से जुड़े छात्र शामिल थे। प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और उद्योगपति गौतम अडानी के खिलाफ विवादित नारे लगाए गए।
छात्र संघ और वामपंथी संगठनों की भागीदारी
सूत्रों के अनुसार जेएनयू छात्र संघ के संयुक्त सचिव दानिश और सचिव सुनील प्रदर्शन स्थल पर मौजूद थे। साथ ही कई वामपंथी समूहों से जुड़े छात्र भी इस प्रदर्शन में शामिल हुए। प्रशासन और पुलिस ने इस मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
“MODI SHAH KI KABRA KHUDEGI JNU KI DHARTI PAR”
Urban Naxals in support of Anti National Umar Khalid and Sharjeel Imam protested late night in JNU outside Sabarmati Hostel.
This is not protest, this appropriation of Anti India Thought!
Intellectual Terorist can be academics,… pic.twitter.com/vwDoiI63pf
— Pradeep Bhandari(प्रदीप भंडारी)🇮🇳 (@pradip103) January 6, 2026
राजनीतिक बयानबाजी तेज
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं। दिल्ली के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने नारेबाजी की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह देश और कानून के प्रति अपमान है। वहीं कांग्रेस नेता उदित राज ने कहा कि यह नाराजगी जताने का तरीका है और कोर्ट का फैसला मुस्लिम छात्रों के प्रति अन्यायपूर्ण है। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने इसे “टुकड़े-टुकड़े गिरोह” का समर्थन बताते हुए इसे राष्ट्रविरोधी कदम करार दिया।
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सोशल मीडिया पर बवाल
सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं आई हैं। पत्रकार प्रदीप भंडारी ने ट्वीट कर कहा कि यह विरोध नहीं, बल्कि भारत-विरोधी विचारधारा का समर्थन है और इसे “इंटेलेक्चुअल टेररिज्म” के रूप में देखा जाना चाहिए।









