Government Order Violated : रायगढ़/धरमजयगढ़: सरकारी नियमों और कलेक्टर कार्यालय के आदेशों को खुली चुनौती देने का एक सनसनीखेज मामला पुरूंगा से सामने आया है। यहाँ शासकीय आदिवासी कन्या आश्रम पुरूंगा में नई प्रभारी की नियुक्ति को लेकर स्थानीय सरपंच और ग्रामीणों ने अघोषित मोर्चा खोल दिया है, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।
प्रशासनिक व्यवस्था सुधारने के लिए जारी हुआ था आदेश
सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास रायगढ़ ने 26 दिसंबर 2025 को आदेश (क्रमांक/6584) जारी कर श्रीमती बृहस्पति बाई चौहान को पुरूंगा आश्रम का अस्थायी प्रभार सौंपा था। यह निर्णय इसलिए लिया गया क्योंकि पूर्व प्रभारी सुश्री भूमिका सिंह राठौर दूरी अधिक होने के कारण आश्रम के सुचारू संचालन में असमर्थ थीं। शासन की मंशा छात्राओं की सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता देना था।
सरपंच और ग्रामीणों का ‘अवैध’ हस्तक्षेप
हैरानी की बात यह है कि जैसे ही नई प्रभारी बृहस्पति चौहान अपना कार्यभार ग्रहण करने आश्रम पहुँचीं, स्थानीय सरपंच और कुछ ग्रामीणों ने उन्हें जॉइन करने से रोक दिया। सूत्रों का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया ‘गांव की राजनीति’ की भेंट चढ़ गई है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या अब सरकारी संस्थाओं का संचालन प्रशासनिक अधिकारियों के बजाय स्थानीय रसूखदारों की मर्जी से होगा?
सरकारी कार्य में बाधा और छात्राओं की सुरक्षा पर संकट
इस विवाद के कारण आश्रम में रह रही आदिवासी छात्राओं की व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं।
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सरकारी बाधा: प्रशासनिक आदेश के क्रियान्वयन में अड़ंगा डालना सीधे तौर पर सरकारी कार्य में व्यवधान डालने की श्रेणी में आता है।
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लापरवाही: विकास खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) और जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को सूचना होने के बावजूद धरातल पर नई प्रभारी को कार्यभार नहीं दिला पाना प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है।
अब क्षेत्र की जनता और शिक्षा जगत की नजरें रायगढ़ कलेक्टर पर टिकी हैं। क्या प्रशासन इन ‘दबंगों’ पर कड़ी कार्रवाई कर सरकारी आदेश की गरिमा बहाल करेगा, या नियम इसी तरह ताक पर रखे रहेंगे?











