शाजापुर: जिले के गुलाना क्षेत्र में बीयर निर्माण से निकलने वाले अवशेष (बीयर दाना/राप) से भरे एक ट्रक और एक पिकअप वाहन को जब्त किए जाने के बाद प्रशासनिक असमंजस की स्थिति बन गई है। गुलाना तहसीलदार रितेश जोशी ने दोनों वाहनों को पकड़कर सलसलाई थाने में खड़ा करवाया, लेकिन घटना के पांच घंटे बाद तक भी किसी ठोस कार्रवाई का निर्णय नहीं हो सका।
देर रात तक नहीं बन पाई कार्रवाई की रूपरेखा
जानकारी के अनुसार, वाहनों की जब्ती के बाद रात करीब 10 बजे तक अलग-अलग विभागों के अधिकारी मौके पर पहुंचे, लेकिन कार्रवाई को लेकर कोई स्पष्ट निष्कर्ष नहीं निकल पाया। अधिकारियों के बीच यह तय नहीं हो सका कि यह मामला किस विभाग के अधिकार क्षेत्र में आता है और किस अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाए।
कई विभाग मौके पर, फिर भी भ्रम की स्थिति
मामले की गंभीरता को देखते हुए शाजापुर से खाद्य विभाग, फूड इंस्पेक्टर, वेटनरी विभाग, जिला आपूर्ति कार्यालय, कृषि विभाग सहित अन्य विभागों के अधिकारी मौके पर पहुंचे। बावजूद इसके, सभी विभाग कार्रवाई को लेकर एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते नजर आए।
तहसीलदार ने कही स्पष्टता की बात
तहसीलदार रितेश जोशी ने कहा कि फिलहाल वाहनों को थाने में सुरक्षित खड़ा कराया गया है और अगले दिन ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि किस कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। प्रशासनिक स्तर पर मार्गदर्शन के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी।
दूध उत्पादन बढ़ाने में हो रहा राप का उपयोग
बताया जा रहा है कि बीयर निर्माण के बाद बचने वाले अवशेष को पशुपालक दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए चारे के रूप में उपयोग कर रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि इससे गाय और भैंसें सामान्य से दो से तीन गुना अधिक दूध देने लगती हैं।
स्वास्थ्य और पशु सुरक्षा पर उठे सवाल
हालांकि, पशुओं को बीयर राप खिलाना सुरक्षित है या नहीं, इस पर अब तक कोई ठोस वैज्ञानिक शोध उपलब्ध नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि बिना जांच और मानक तय किए इस तरह के प्रयोग पशुओं और मानव स्वास्थ्य दोनों के लिए खतरा बन सकते हैं।











