Tuesday, October 6, 2026
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पुतिन की भारत यात्रा बनेगा गेमचेंजर! कामगार मोबिलिटी से लेकर Su-57 तक PM मोदी से होगी अहम बातचीत

Putin Modi
पीएम नरेंद्र मोदी और व्लादिमीर पुतिन

नई दिल्ली : रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा ने राजधानी दिल्ली में कूटनीतिक हलचल बढ़ा दी है। यह दौरा केवल एक औपचारिक मुलाकात नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने वाला अहम पड़ाव माना जा रहा है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस यात्रा में रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, गतिशीलता और कूटनीतिक विस्तार से जुड़े कई बड़े फैसले लिए जा सकते हैं।

रिश्तों में नई ऊर्जा, भारत–रूस साझेदारी तेज
साल 2000 के बाद से पुतिन का यह 23वां वार्षिक सम्मेलन है, लेकिन इस बार परिस्थितियां अलग हैं। रूस भारत को कच्चे तेल, उर्वरक और ऊर्जा उत्पादों की बड़ी सप्लाई दे रहा है, जबकि भारत एफटीए के माध्यम से अपने उत्पादों को रूसी बाजार में और बड़ी पहुंच दिलाना चाहता है। इसी कारण दिल्ली में आयोजित होने वाला इंडिया–रूस बिजनेस फोरम इस यात्रा का प्रमुख आकर्षण है।

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रूस में दो नए भारतीय वाणिज्य दूतावास
भारत रूस में अपनी कूटनीतिक उपस्थिति बढ़ाने की तैयारी कर चुका है। कज़ान और येकातेरिनबर्ग में नए काउंसलेट खुलने से भारतीय कंपनियों और प्रवासी नागरिकों को बड़ा लाभ होगा। इससे वीजा, व्यापार और वर्क-रिलेटेड सेवाएं आसान होंगी।

रक्षा सहयोग और Su-57 पर उच्च-स्तरीय चर्चा
रक्षा क्षेत्र इस यात्रा का प्रमुख एजेंडा है। माना जा रहा है कि दोनों देश Su-57 जैसे उन्नत लड़ाकू प्लेटफॉर्म और अन्य रक्षा प्रोजेक्टों पर गहन चर्चा करेंगे। इसके अलावा रूस–यूक्रेन युद्ध और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी विचार-विमर्श होगा।

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भारतीय कामगारों के लिए नए अवसर
भारत और रूस के बीच स्किल्ड और सेमी-स्किल्ड वर्कर्स की मोबिलिटी एग्रीमेंट लगभग तैयार है। रूस को इस समय बड़ी संख्या में विदेशी कामगारों की आवश्यकता है, ऐसे में यह समझौता भारतीयों के लिए रोजगार के नए रास्ते खोलेगा। विदेश मंत्रालय ने साथ ही भारतीयों को विदेश में किसी भी कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर करते समय सावधानी बरतने की सलाह दी है।

व्यापार बढ़ाने और घाटा कम करने पर ध्यान
भारत–रूस व्यापार का फोकस ऊर्जा सुरक्षा और उर्वरक सप्लाई सुनिश्चित करने पर है। दोनों देश उच्च व्यापार घाटे को कम करने और रुपया–रूबल ट्रेड व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए काम कर रहे हैं।अगर वैश्विक प्रतिबंधों में बदलाव आता है तो कंपनियां अपने स्तर पर निर्णय लेंगी।

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