Mainpat Bauxite Mine : गौरी शंकर गुप्ता /अंबिकापुर-मैनपाट। छत्तीसगढ़ के मैनपाट क्षेत्र में मेसर्स मां कुदरगढ़ी स्टील्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा प्रस्तावित 135 हेक्टेयर की बॉक्साइट खनन परियोजना को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और आदिवासी समुदायों में गहरा तनाव व्याप्त है। रविवार को नर्मदापुर स्टेडियम में आयोजित सरकारी जनसुनवाई भारी विरोध प्रदर्शन की भेंट चढ़ गई, जहाँ आक्रोशित ग्रामीणों ने जिला प्रशासन द्वारा लगाए गए टेंट और पंडाल को उखाड़ फेंका।![]()
खदान से आजीविका और पर्यावरण को खतरा
स्थानीय लोग कंडराजा, नर्मदापुर, उरंगा और अन्य गांवों से एकजुट होकर इस खदान को अस्वीकार कर रहे हैं। ग्रामीणों का मुख्य तर्क है कि सालाना 80,700 टन बॉक्साइट उत्खनन वाली यह परियोजना उनके पहाड़ों, जंगलों, और सबसे महत्वपूर्ण जलस्रोतों को नष्ट कर देगी, जिससे खेती और पशुपालन पर निर्भर उनकी आजीविका बुरी तरह प्रभावित होगी।
Mainpat Bauxite Mine :
पर्यावरण संकट: खदान से भूजल स्तर कम होने, जल प्रदूषण बढ़ने और पहाड़ियों के कटाव की आशंका है।
वन्य जीव सुरक्षा: यह क्षेत्र हाथी समेत अन्य वन्य जीवों का आवास है, और खनन से मानव-वन्य जीव संघर्ष बढ़ने का खतरा है।
स्वास्थ्य जोखिम: ट्रकों की आवाजाही से धूल और प्रदूषण फैलने की संभावना है, जो लोक स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है।
जनसुनवाई से पहले ही फूटा आक्रोश
जिला प्रशासन ने 30 नवंबर को नर्मदापुर स्टेडियम में जनसुनवाई का आयोजन किया था, लेकिन ग्रामीणों ने इसे खदान के समर्थन में एक नियंत्रित प्रक्रिया बताते हुए खारिज कर दिया।
Mainpat Bauxite Mine
विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहीं जिला पंचायत सदस्य रतनी नाग ने साफ कहा कि प्रशासन स्थानीय लोगों की वास्तविक चिंता को नजरअंदाज कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक उनकी चिंताओं का समाधान नहीं होता, वे जंगल, पहाड़ और जलस्रोतों को नष्ट करने वाली किसी भी परियोजना को अनुमति नहीं देंगे। भारी आक्रोश के चलते प्रदर्शनकारियों ने मौके पर ही प्रशासन द्वारा तैयार किए गए पंडाल और टेंट को उखाड़ फेंका।
प्रशासन और सामाजिक संगठनों का रुख
हिंसा भड़कने के बाद प्रशासन ने सुरक्षा कड़ी कर दी है और माहौल नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सरकार रोजगार और सड़क निर्माण के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता देती है, लेकिन अराजकता और हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
वहीं, पर्यावरण कार्यकर्ता और सामाजिक संगठन स्थानीय लोगों के समर्थन में खड़े हैं। उनका मानना है कि मैनपाट की प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता को खतरा पहुंचाने वाली किसी भी परियोजना को मंजूरी नहीं मिलनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन उनकी चिंताओं को अनदेखा करता है, तो वे बड़े पैमाने पर आंदोलन की योजना बना रहे हैं।
फिलहाल, इस मामले ने विकास और संरक्षण के बीच संतुलन बनाने के लिए स्थानीय प्रशासन, कंपनी और आम जनता के बीच अधिक संवेदनशील संवाद की आवश्यकता को बल दिया है।











