रायपुर। भारत की एक बहुत बड़ी आबादी आज भी गांवों और कृषि प्रधान क्षेत्रों में निवास करती है। यही कारण है कि ग्रामीण इलाकों और खेतों में काम करने वाले लोगों के बीच सांपों का डर और उनका आतंक हमेशा बना रहता है। हालांकि, अब तेजी से हो रहे शहरीकरण की वजह से सांप अक्सर शहरों की रिहायशी बस्तियों में भी दिखाई देने लगे हैं। इस गंभीर खतरे से निपटने और लोगों को सुरक्षित रखने के लिए अब आधुनिक तकनीक की मदद ली जा रही है। डिजिटल युग में अब ऐसे कई बेहतरीन मोबाइल ऐप्स आ चुके हैं, जो सांपों के हमले से बचाने में मददगार साबित हो सकते हैं।
मैप के जरिए दिखेगी सांपों की सही लोकेशन
सांपों के खतरे वाले संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए ‘बिग 4 मैपर’ (Big 4 Mapper) ऐप काफी उपयोगी है। इस ऐप की सबसे बड़ी और मुख्य खासियत यह है कि इसमें बकायदा मैप के जरिए सांपों की लोकेशन दिखाई जाती है। इसके तहत अगर किसी चिन्हित इलाके में पहले कभी सांप देखा गया है, तो उसकी पूरी जानकारी इस डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज रहती है। परिणामस्वरूप, यूजर को पहले से ही अंदाजा हो जाता है कि कौन सा रास्ता या जगह ज्यादा जोखिम वाली है, जिससे वे सतर्क हो सकते हैं।

सांप कितना जहरीला है, ऐप से तुरंत पहचानें
अक्सर लोग सामने दिख रहे सांप को देखकर यह समझ नहीं पाते हैं कि वह जहरीला है या नहीं। इसी घबराहट और जानकारी के अभाव में कई बार लोग गलत कदम उठा लेते हैं। इसके विपरीत, यह ऐप अलग-अलग प्रजातियों के सांपों की प्रामाणिक जानकारी और तस्वीरों के जरिए उनकी सटीक पहचान करने में मदद करता है। यह ऐप मुख्य रूप से भारत के चार सबसे खतरनाक और जहरीले सांपों पर फोकस करता है। इनमें रसेल वाइपर, नाग (कोबरा), करैत और सॉ-स्केल्ड वाइपर जैसी प्रजातियां शामिल हैं, जो सबसे ज्यादा मौतों के लिए जिम्मेदार हैं।
‘सर्पेंट’ ऐप भी लोकेशन ट्रैकिंग में है मददगार
‘बिग 4 मैपर’ की तरह ही बाजार में उपलब्ध ‘सर्पेंट’ (SERPENT) ऐप में भी एक बेहतरीन मैपिंग फीचर दिया गया है। इसकी मदद से किसान और खेतों में काम करने वाले मजदूर यह आसानी से देख सकते हैं कि उनके आसपास के खेतों में कहां ज्यादा खतरा है। यह फीचर विशेष रूप से उन लोगों के लिए बेहद जरूरी है जो रात के समय सिंचाई के लिए बाहर निकलते हैं। इसके अलावा, ऐप के जरिए लोग पहले से ही सुरक्षित स्थानों का चयन कर जोखिम भरे रास्तों से दूरी बना सकते हैं।
सांप काटने पर क्या करें और क्या न करें
अक्सर लोग डर और अंधविश्वास के कारण सांप के काटने पर झाड़-फूंक या गलत घरेलू इलाज करने लगते हैं। इसके परिणामस्वरूप स्थिति सुधरने के बजाय और ज्यादा गंभीर हो जाती है। इन दोनों ही ऐप्स में बेहद आसान और सरल भाषा में फर्स्ट एड यानी प्राथमिक उपचार के तरीके बताए गए हैं। ये ऐप्स बताते हैं कि ऐसी आपातकालीन स्थिति में शांत रहना, पीड़ित को बिना हिलाए-डुलाए रखना और तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल पहुंचना क्यों जरूरी है। अंततः, इस तरह के डिजिटल सेफ्टी टूल्स न केवल लोगों में जागरूकता बढ़ा रहे हैं, बल्कि समय पर सही जानकारी देकर जान बचाने का काम भी कर रहे हैं।









