Mainpat Bauxite Mine : मैनपाट बॉक्साइट खदान विवाद गहराया : जनसुनवाई के दौरान भारी विरोध, ग्रामीणों ने उखाड़ा पंडाल

VIKASH KHALKHO

Mainpat Bauxite Mine : गौरी शंकर गुप्ता /अंबिकापुर-मैनपाट। छत्तीसगढ़ के मैनपाट क्षेत्र में मेसर्स मां कुदरगढ़ी स्टील्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा प्रस्तावित 135 हेक्टेयर की बॉक्साइट खनन परियोजना को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और आदिवासी समुदायों में गहरा तनाव व्याप्त है। रविवार को नर्मदापुर स्टेडियम में आयोजित सरकारी जनसुनवाई भारी विरोध प्रदर्शन की भेंट चढ़ गई, जहाँ आक्रोशित ग्रामीणों ने जिला प्रशासन द्वारा लगाए गए टेंट और पंडाल को उखाड़ फेंका।Mining bauxite from CMDC mines in Mainpat and illegally dumping it in the  yard | बाॅक्साइट में खेल: मैनपाट में सीएमडीसी के माइंस से बाॅक्साइट का खनन  कर यार्ड में अवैध तरीके

खदान से आजीविका और पर्यावरण को खतरा
स्थानीय लोग कंडराजा, नर्मदापुर, उरंगा और अन्य गांवों से एकजुट होकर इस खदान को अस्वीकार कर रहे हैं। ग्रामीणों का मुख्य तर्क है कि सालाना 80,700 टन बॉक्साइट उत्खनन वाली यह परियोजना उनके पहाड़ों, जंगलों, और सबसे महत्वपूर्ण जलस्रोतों को नष्ट कर देगी, जिससे खेती और पशुपालन पर निर्भर उनकी आजीविका बुरी तरह प्रभावित होगी।मैनपाट में तनाव! जनसुनवाई से पहले बॉक्साइट खदान का विरोध हुआ शुरू, लोगों ने  पंडाल उखाड़कर फेंका

Mainpat Bauxite Mine :
पर्यावरण संकट:
खदान से भूजल स्तर कम होने, जल प्रदूषण बढ़ने और पहाड़ियों के कटाव की आशंका है।

वन्य जीव सुरक्षा: यह क्षेत्र हाथी समेत अन्य वन्य जीवों का आवास है, और खनन से मानव-वन्य जीव संघर्ष बढ़ने का खतरा है।

स्वास्थ्य जोखिम: ट्रकों की आवाजाही से धूल और प्रदूषण फैलने की संभावना है, जो लोक स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है।

जनसुनवाई से पहले ही फूटा आक्रोश
जिला प्रशासन ने 30 नवंबर को नर्मदापुर स्टेडियम में जनसुनवाई का आयोजन किया था, लेकिन ग्रामीणों ने इसे खदान के समर्थन में एक नियंत्रित प्रक्रिया बताते हुए खारिज कर दिया।बॉक्साइट खदान को लेकर आक्रोश: जनसुनवाई के लिए लगे टेंट को ग्रामीणों ने  उखाड़ा, बोले- माइंस के कारण ख़राब हो रहा पर्यावरण -

Mainpat Bauxite Mine 
विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहीं जिला पंचायत सदस्य रतनी नाग ने साफ कहा कि प्रशासन स्थानीय लोगों की वास्तविक चिंता को नजरअंदाज कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक उनकी चिंताओं का समाधान नहीं होता, वे जंगल, पहाड़ और जलस्रोतों को नष्ट करने वाली किसी भी परियोजना को अनुमति नहीं देंगे। भारी आक्रोश के चलते प्रदर्शनकारियों ने मौके पर ही प्रशासन द्वारा तैयार किए गए पंडाल और टेंट को उखाड़ फेंका।

प्रशासन और सामाजिक संगठनों का रुख
हिंसा भड़कने के बाद प्रशासन ने सुरक्षा कड़ी कर दी है और माहौल नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सरकार रोजगार और सड़क निर्माण के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता देती है, लेकिन अराजकता और हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।बॉक्साइट खनन की पारिस्थितिक बहाली: एक पारिस्थितिक दृष्टिकोण - साइंसडायरेक्ट

वहीं, पर्यावरण कार्यकर्ता और सामाजिक संगठन स्थानीय लोगों के समर्थन में खड़े हैं। उनका मानना है कि मैनपाट की प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता को खतरा पहुंचाने वाली किसी भी परियोजना को मंजूरी नहीं मिलनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन उनकी चिंताओं को अनदेखा करता है, तो वे बड़े पैमाने पर आंदोलन की योजना बना रहे हैं।

फिलहाल, इस मामले ने विकास और संरक्षण के बीच संतुलन बनाने के लिए स्थानीय प्रशासन, कंपनी और आम जनता के बीच अधिक संवेदनशील संवाद की आवश्यकता को बल दिया है।

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विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।
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