नई दिल्ली: एक बड़ी खबर के अनुसार अमेरिका की नई खुफिया रिपोर्ट में सामने आया है कि मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन ने पाकिस्तान के माध्यम से भारत के खिलाफ बड़े पैमाने पर झूठा प्रोपगंडा फैलाया। इसमें चीन का साफ़ उद्देश्य था कि भारत के राफेल लड़ाकू विमानों को कमजोर दिखाकर अपना नया J-35 स्टेल्थ फाइटर जेट बेचने का बाजार तैयार करना।
सोशल मीडिया और AI के जरिए फैलाया झूठ
इस नई खुफिया रिपोर्ट के अनुसार चीन ने ह जारों फेक सोशल मीडिया अकाउंट बनाए और AI तकनीक से नकली तस्वीरें तैयार कीं। इन तस्वीरों में दिखाया गया कि राफेल विमानों को पाकिस्तान ने आसानी से मार गिराया। इसके बाद यह प्रचार वैश्विक मंच पर फैलाया गया। चीन ने इसे अपने हथियारों की बिक्री के लिए प्रचारित किया, जिससे पाकिस्तान की सेना को हथियारों में बढ़त दिखाने का संदेश भी गया।

भारत के अंदर भी मिला सहयोग?
हालांकि चीन के प्रोपगंडा अभियान को भारत के कुछ लोग और ग्रुप अनजाने में आगे बढ़ाते रहे। सोशल मीडिया पर नकली तस्वीरें और सवाल साझा किए गए, जबकि वायुसेना ने तभी साफ़ किया था कि ऑपरेशनल जानकारी साझा करना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है।
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सच्चाई क्या थी?
भारतीय वायुसेना ने यह भी स्पष्ट किया था कि ऑपरेशन के दौरान सभी राफेल विमान सुरक्षित थे। केवल तीन पुराने मिग-21 विमान नुकसान में आए थे। इसके बावजूद चीन का प्रोपगंडा महीनों तक चला और दुनिया में गलत संदेश गया।
पाकिस्तान को हथियार बेचने का एजेंडा
जानकारी के अनुसार चीन ने पाकिस्तान को J-35 स्टेल्थ फाइटर, KJ-500 AWACS और HQ-19 एंटी-मिसाइल सिस्टम देने की पेशकश की। अमेरिकी रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन ने पाकिस्तान की बेचैनी का फायदा उठाकर भारत के खिलाफ क्षेत्रीय संतुलन को प्रभावित करने की कोशिश की। HQ-19 जैसे सिस्टम भारत के मिसाइल और एयर डिफेंस ढांचे के लिए गंभीर चुनौती पैदा कर सकते हैं।
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दक्षिण एशिया में रणनीतिक प्रभाव
इस बाबत विशेषज्ञों का कहना है कि चीन का यह प्रोपगंडा केवल हथियारों की बिक्री तक सीमित नहीं है। यह दक्षिण एशिया में भारत को अस्थिर दिखाने, वैश्विक सुरक्षा छवि को चुनौती देने और पाकिस्तान के भरोसे को बढ़ाने की रणनीति है। भारत की राफेल और तेजस जैसी आधुनिक तकनीकें चीन के झूठे दावों को बेअसर कर रही हैं, लेकिन रणनीतिक सतर्कता जरूरी है।
इस तरह देखा जाए तो चीन–पाकिस्तान का प्रोपगंडा अभियान साबित करता है कि भारत की सैन्य ताकत बढ़ने पर भी क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर विरोधी रणनीति तेजी से सक्रिय रहती है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को अपनी सामरिक ताकत और सुरक्षा नीति के साथ-साथ सूचना युद्ध में भी सतर्क रहना होगा।













