Death Threats : लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की जेल में बंद एक शातिर साइबर ठग ने सनसनीखेज साजिश रचकर सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ₹3700 करोड़ के साइबर फ्रॉड का मुख्य आरोपी अनुभव मित्तल, जिसने फर्जी ऑनलाइन ट्रेडिंग स्कीम के जरिए लगभग सात लाख निवेशकों को ठगा था, उसने जेल के भीतर से इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक जज को धमकी भरा ईमेल भेज दिया। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि वह यह सब अपने किसी साथी कैदी को फंसाने की मंशा से कर रहा था।
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कांस्टेबल के फोन से भेजी धमकी
पुलिस अधिकारी के अनुसार, 2017 में स्पेशल टास्क फोर्स (STF) द्वारा गिरफ्तार किए गए अनुभव मित्तल पर पहले से ही 324 आपराधिक मामले दर्ज हैं। जांच में सामने आया कि मित्तल ने अपने साथी कैदी आनंदेश्वर अग्रहरि को फंसाने के लिए यह साजिश रची। उसने फर्जी नाम से धमकी भरा मैसेज भेजा, जिसमें लिखा था कि लखनऊ बेंच के एक जज का मर्डर होने वाला है।
साइबर सेल और क्राइम ब्रांच की संयुक्त जांच में खुलासा हुआ कि यह ईमेल पुलिस लाइंस में तैनात कांस्टेबल अजय कुमार के फोन से भेजा गया था।
Death Threats : केस स्टेटस के बहाने लिया फोन, सेट किया टाइमर
जांच में पता चला कि कांस्टेबल अजय कुमार 4 नवंबर को कोर्ट में सुनवाई के दौरान अनुभव मित्तल के साथ था। इसी दौरान शातिर आरोपी ने केस स्टेटस चेक करने के बहाने कांस्टेबल का फोन लिया और गुपचुप तरीके से एक नई ईमेल आईडी बना डाली। उसने उस ईमेल को अगले दिन, 5 नवंबर की सुबह, ऑटो-सेंड करने के लिए टाइमर सेट कर दिया था। जैसे ही टाइमर पूरा हुआ, धमकी भरा मेल जज को चला गया, जिससे हड़कंप मच गया।
कांस्टेबल अजय कुमार ने पूछताछ में बताया कि उसे अंदाजा भी नहीं था कि अनुभव मित्तल उसके फोन से क्या करने वाला है, उसने सिर्फ केस स्टेटस दिखाने के लिए फोन दिया था।
Death Threats : साजिश का मकसद: साथी कैदी को फंसाना
पुलिस जांच में सामने आया कि अनुभव मित्तल का असली मकसद जज को धमकाना नहीं था, बल्कि अपनी पुरानी दुश्मनी के चलते साथी कैदी आनंदेश्वर अग्रहरि को इस मामले में फंसाना था। आनंदेश्वर अग्रहरि दिसंबर 2023 से एक मर्डर केस में जेल में बंद है। इस पूरे मामले की शिकायत के बाद, शुक्रवार को अनुभव मित्तल और कांस्टेबल अजय कुमार के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।
लखनऊ पुलिस अब इस बात की गहन जांच कर रही है कि जेल में बंद अनुभव मित्तल को मोबाइल फोन या इंटरनेट एक्सेस कैसे मिला, और क्या इस साजिश में किसी अन्य जेलकर्मी की मिलीभगत थी।













