India Pakistan Crisis/नई दिल्ली: आख़िरकार पाकिस्तान ने एक बार फिर अपने सैन्य ढांचे में बड़े बदलाव की घोषणा की है। सरकार ने अपने संविधान में संशोधन के लिए 27वां संशोधन बिल पेश किया है, जिसके तहत एक नया पद चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज बनाया जाएगा। वहीं इस पद की जिम्मेदारी पाकिस्तान आर्मी चीफ असिम मुनीर को सौंपी जाएगी। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब भारत-पाकिस्तान सीमा पर हाल ही में तनावपूर्ण घटनाएं हुई हैं।
नया पद और उसका महत्व
इस बाबत पाकिस्तान सरकार का कहना है कि नया पद तीनों सेनाओं—थल सेना, नौसेना और वायु सेना—के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करेगा। राष्ट्रपति इस पद पर नियुक्ति प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सलाह पर करेंगे। आमतौर पर आर्मी चीफ को ही चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज बनाया जाता है, लेकिन इस कदम से अब असिम मुनीर को तीनों सेनाओं का सर्वोच्च नेतृत्व मिलने वाला है।
ऑपरेशन सिंदूर और भारत-पाक सीमा पर हालात
India Pakistan Crisis मामले पर पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह कदम ऑपरेशन सिंदूर के बाद उठाया गया। ऑपरेशन सिंदूर में भारत के हवाई और सीमावर्ती हमलों के दौरान पाकिस्तान की कई सैन्य संपत्तियां नष्ट हुईं। F-16 सहित कई लड़ाकू विमान जमीन पर गिर गए। चार दिनों की लड़ाई के बाद पाकिस्तान ने लड़ाई रोकने की गुहार लगाई थी। इस घटना ने पाकिस्तान में सैन्य नेतृत्व और रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए।
असिम मुनीर की बढ़ती ताकत
India Pakistan Crisis जानकारी दें कि, ऑपरेशन सिंदूर के बाद असिम मुनीर को फील्ड मार्शल बनाया गया था, जो पाक सेना का दूसरा सबसे बड़ा पद है। अब संविधान में संशोधन कर उन्हें तीनों सेनाओं का प्रमुख बनाया जा रहा है। यह भारत-पाक सीमा पर रणनीतिक संतुलन को प्रभावित करने वाला कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की बढ़ती हवाई और सीमा सुरक्षा क्षमता ने पाकिस्तान को इस कदम के लिए प्रेरित किया।
भारत के लिए रणनीतिक चुनौती
भारत-पाकिस्तान सीमा पर इस तरह के बदलाव से भारत की सुरक्षा और रणनीतिक योजना पर असर पड़ सकता है। भारत को न केवल सीमाओं की निगरानी बढ़ानी होगी, बल्कि पाकिस्तान की नई सैन्य संरचना और समन्वित संचालन के लिए रणनीतिक तैयारियों को भी मजबूत करना होगा।
देखा जाए तो, पाकिस्तान में असिम मुनीर के हाथों इतनी बड़ी शक्ति का केंद्रित होना, भारत-पाकिस्तान सीमा पर तनाव और भविष्य की संभावित घटनाओं के दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण है। इस बाबत विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम पाकिस्तान की सैन्य मजबूती और भारत के खिलाफ रणनीतिक संतुलन बनाने की कोशिश का हिस्सा है।













