सिंगरौली – जिले के महुआ गांव स्थित शासकीय जनजातीय जूनियर छात्रावास में रह रहे छात्रों को मेनू के अनुसार नाश्ता और भोजन नहीं दिया जा रहा है। बच्चों और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, छात्रावास अधीक्षक द्वारा भोजन और नाश्ते में लापरवाही बरती जा रही है और कागजों पर ही व्यवस्था दर्शाकर सरकारी राशि की आहरण प्रक्रिया पूरी कर ली जाती है।
जानकारी के अनुसार, इस छात्रावास में 50 सीटें हैं, जिनमें से 35 से 40 छात्र नियमित रूप से रह रहे हैं। बच्चों ने बताया कि सुबह सिर्फ चाय और बिस्कुट, और शाम को पोहा दिया जाता है। जबकि शासन द्वारा निर्धारित मेनू के अनुसार, हर दिन अलग-अलग प्रकार का पौष्टिक नाश्ता और भोजन मिलना चाहिए।
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निर्धारित मेन्यू के अनुसार मिलना चाहिए:
- सुबह का नाश्ता: चना-चाय, ब्रेड-चाय, मूंगफली-चाय, पोहा, बिस्कुट
- शाम का नाश्ता: लाई-चना, भूना चना, मुरमुरे, तले चने
- दैनिक भोजन: चावल, दाल, मौसमी सब्ज़ी, रोटी, अचार
- मासिक विशेष भोजन: खीर, पूड़ी, सेवइयां, पापड़, अचार
वर्तमान में क्या मिल रहा है: बच्चों के अनुसार, रोजाना का भोजन बस पतली दाल, आलू की सब्जी, चावल और रोटी तक सीमित है। विशेष भोजन और मेनू में दिए अन्य खाद्य पदार्थों की व्यवस्था सिर्फ कागज़ों तक सीमित है।
स्थानीय लोग और बच्चों के परिजन अधीक्षक पर भोजन में हेराफेरी और भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे हैं। वहीं विभागीय अधिकारी कभी-कभार निरीक्षण के लिए आते हैं लेकिन सतही जांच कर लौट जाते हैं, जिससे स्थिति जस की तस बनी हुई है।
प्रश्न यह उठता है कि क्या जिला प्रशासन इस पर गंभीरता से जांच करेगा या फिर यह “कागजों की खानापूर्ति” और बच्चों की उपेक्षा यूं ही चलती रहेगी?











