Tikamgarh News : टीकमगढ़। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सभी जिलों के कलेक्टरों और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों () को फर्जी और झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे, लेकिन टीकमगढ़ जिले में इन निर्देशों का कोई असर दिखाई नहीं दे रहा है। जिले के ग्रामीण इलाकों में झोलाछाप डॉक्टरों का राज चल रहा है, जो बिना किसी वैध डिग्री के बेखौफ दुकानें खोलकर लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं।
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Tikamgarh News : गलत इलाज से गई लोगों की जान
टीकमगढ़ जिले में झोलाछाप डॉक्टरों के गलत इलाज के कारण होने वाली मौतों का आंकड़ा चौंकाने वाला है। पिछले लगभग एक साल में आधा दर्जन (6) से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। इन झोलाछाप डॉक्टरों ने कई गाँवों में यमदूत बनकर लोगों की जान ली है, लेकिन इन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन फर्जी डॉक्टरों की प्रशासनिक तंत्र में अच्छी पकड़ होने के कारण इन्हें संरक्षण मिला हुआ है।
कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति
प्रशासन द्वारा इन यमदूतों पर कार्रवाई के नाम पर केवल जनता से मजाक किया जाता है। पिछले दिनों स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिला मुख्यालय के नजदीकी गाँव पपौरा, कुडीला, चंद्रपुरा, डारगुवां सहित कई गाँवों में कुछ दुकानों को सील किया गया था, लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि एक सप्ताह के भीतर ही विभाग ने उन्हें हरी झंडी दे दी और दुकानें फिर से खुल गईं।
झोलाछाप डॉक्टरों की दुकानों का इतनी जल्दी दोबारा खुल जाना सीधे तौर पर सीएमएचओ से लेकर विभाग के अन्य अधिकारियों की संलिप्तता की ओर इशारा करता है, जिसके चलते प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है और गंभीर कार्रवाई के नाम पर मामूली खानापूर्ति की जाती है।
इस पूरे मामले पर सीएमएचओ का कहना है कि यदि सील की गई दुकानें दोबारा खोली गई हैं तो वह टीम भेजकर पुष्टि करेंगे और खुली पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, उनका यह बयान कहीं न कहीं यह दर्शाता है कि झोलाछाप डॉक्टरों को विभाग के अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है।













