पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तारीखों की घोषणा से ठीक पहले प्रदेश में ‘बुर्का और घूंघट’ को लेकर नई राजनीतिक बहस छिड़ गई है। बीजेपी के गन्ना उद्योग मंत्री कृष्णनंदन पासवान ने कहा है कि अगर मतदान के दौरान बुर्का पहनकर आने की अनुमति है, तो फिर घूंघट भी स्वीकार्य होना चाहिए। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है।
दरअसल, बिहार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने हाल ही में चुनाव आयोग की बैठक में यह मुद्दा उठाया था कि बुर्का में आने वाली महिलाओं के चेहरे की पहचान वोटर कार्ड से कराई जाए, ताकि मतदान प्रक्रिया पारदर्शी रहे। अब मंत्री पासवान ने इस पर समर्थन जताते हुए कहा, “अगर बुर्का चलेगा तो घूंघट भी चलेगा। दोनों में भेदभाव नहीं होना चाहिए।” उन्होंने यह बयान मोतिहारी में दिया।
पासवान ने कहा कि पार्टी की ओर से स्पष्ट मत है कि मतदान केंद्र पर किसी भी मतदाता की पहचान चेहरे से मिलान कराकर ही वोटिंग कराई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में पारदर्शिता जरूरी है, इसलिए पहचान की प्रक्रिया में कोई ढिलाई नहीं होनी चाहिए।
इस बयान के बाद बिहार की सियासत गरमा गई है। विपक्षी दलों ने बीजेपी पर धार्मिक ध्रुवीकरण का आरोप लगाया है। राजद और कांग्रेस के नेताओं ने कहा कि ऐसे बयान समाज को बांटने वाले हैं और चुनाव से पहले माहौल भड़काने की कोशिश की जा रही है।
वहीं, बीजेपी नेताओं का कहना है कि यह बयान किसी समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि मतदान प्रक्रिया की शुचिता के लिए है। उनका तर्क है कि यदि बुर्का में महिलाओं की पहचान जरूरी है, तो परंपरागत घूंघट वाली महिलाओं की पहचान भी उसी तरह की जानी चाहिए।
चुनाव आयोग की ओर से अभी इस विवाद पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुद्दा आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में धार्मिक प्रतीकों और पहचान को लेकर एक बड़ा राजनीतिक विमर्श बन सकता है।











