रायपुर। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के आगामी छत्तीसगढ़ दौरे को लेकर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) चीफ दीपक बैज ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर तीखा हमला बोला है। बैज ने दावा किया है कि राज्य में बीजेपी की गुटबाजी चरम पर है और शाह का यह दौरा इसी को ‘डैमेज कंट्रोल’ करने के लिए है।
गुटबाजी से उथल-पुथल, शाह करेंगे डैमेज कंट्रोल
पीसीसी चीफ दीपक बैज ने मंत्रिमंडल विस्तार के बाद बीजेपी में मचे असंतोष पर तंज कसते हुए कहा:
“मंत्रिमंडल विस्तार के बाद बीजेपी में गुटबाजी चरम पर है और वरिष्ठ विधायक नाराज हैं।”
“पार्टी में उथल-पुथल की स्थिति है। इसी गुटबाजी को शांत करने के लिए अमित शाह रायपुर में रुकेंगे।”
नक्सल समर्पण को बताया ‘इवेंट’, मांगी प्रोफाइल
शाह के छत्तीसगढ़ दौरे से ठीक पहले नक्सलियों के आत्मसमर्पण को लेकर बैज ने राज्य सरकार पर निशाना साधा।
उन्होंने कहा कि पिछले दो-तीन दिनों से हो रहे आत्मसमर्पण को सरकार ‘इवेंट’ की तरह पेश कर रही है।
बैज ने सरकार को चुनौती दी कि वह 103 नक्सलियों का पूरा प्रोफाइल जनता के सामने जारी करे।
उन्होंने बीजेपी के शासनकाल का हवाला देते हुए कहा कि फर्जी सरेंडर और निर्दोष आदिवासियों की गिरफ्तारी को बस्तरवासी आज भी याद करते हैं।
उन्होंने गृहमंत्री से पूछा कि 2016 में नक्सलवाद खत्म करने की डेडलाइन दी गई थी, क्या अब वे 2026 तक नक्सलवाद खत्म होने की गारंटी देंगे।
डबल इंजन की सरकार, फिर सट्टा एप बंद क्यों नहीं?”
एनसीआरबी (NCRB) की रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ के सट्टा कारोबार में नंबर वन होने के मामले पर बैज ने सरकार को घेरा।
उन्होंने कहा, “ऑनलाइन ही नहीं, यह सरकार सभी मामलों में नंबर वन है।”
“2023 के चुनाव में महादेव सट्टा एप को भ्रष्टाचार की भेंट बताया गया था, अब यह एप उसी सरकार में फिर फल-फूल रहा है।”
उन्होंने सवाल किया कि जब राज्य में डबल इंजन की सरकार है, तो फिर ऑनलाइन सट्टा एप बंद क्यों नहीं हुआ? बैज ने आरोप लगाया कि सट्टा एप आय का जरिया बन गया है, इसीलिए छत्तीसगढ़ नंबर वन बना है।
उन्होंने आगे कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था फेल है और भ्रष्टाचार चरम पर है, इसीलिए डीजी कॉन्फ्रेंस करने जा रहे हैं।
चुनाव आयोग के SIR प्रोजेक्ट पर भी सवाल
रायपुर ग्रामीण को चुनाव आयोग द्वारा SIR पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चुने जाने पर बैज ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि रायपुर में तीन अन्य विधानसभा सीटें हैं, तो सिर्फ रायपुर ग्रामीण को ही क्यों चुना गया? उन्होंने कहा कि 2003 के बाद औद्योगिक विकास हुआ, जिससे नए मतदाता जुड़े हैं, ऐसे में उनके नाम काटना सही नहीं है। बैज ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग SIR के तहत प्रोपोगेंडा अपना रहा है।













