Rahul Gandhi press conference : CID जांच से लेकर वोट डिलीशन तक – वोट डिलीट कैसे हुए, किसने भरा फॉर्म? राहुल गांधी ने उठाए बड़े सवाल

नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव आयोग (ECI) पर गंभीर आरोप लगाए। राहुल ने कहा कि देशभर में वोटर-लिस्ट में हेरफेर का खेल “सेंट्रलाइज्ड सॉफ्टवेयर” के जरिए किया जा रहा है। इसमें खासतौर पर कांग्रेस के मज़बूत बूथों को निशाना बनाया गया है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सीधा हमला बोला और कहा कि आयोग जनता से सच्चाई छिपा रहा है।

कर्नाटक और महाराष्ट्र का उदाहरण

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि कर्नाटक के आलंद विधानसभा क्षेत्र में 6,018 वोटर्स के नाम डिलीट किए गए। दिलचस्प बात यह रही कि जिन मतदाताओं के नाम पर डिलीशन आवेदन दाखिल हुए, उन्हें इसकी जानकारी तक नहीं थी। वहीं, महाराष्ट्र के राजुरा में फर्जी वोट जोड़े गए। उन्होंने कहा, “कर्नाटक में असली वोटरों का नाम काटा गया और दूसरी तरफ रैंडम नाम जोड़ दिए गए। यह काम कार्यकर्ता स्तर का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम स्तर का है।”

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CID की जांच और आयोग की चुप्पी

कर्नाटक CID ने इस मामले की जांच करते हुए चुनाव आयोग को 18 महीनों में 18 बार पत्र लिखकर तकनीकी जानकारी मांगी। इनमें डेस्टिनेशन IP, डिवाइस पोर्ट और OTP ट्रेल्स शामिल थे। राहुल गांधी ने कहा कि आयोग ने इनमें से कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई। उन्होंने इसे “सच्चाई छिपाने की कोशिश” बताया और कहा कि यही डेटा बताएगा कि ऑपरेशन कहां से चल रहा था।

कांग्रेस बूथ बने निशाना

राहुल ने कहा कि 2018 में आलंद के 10 में से 8 बूथ कांग्रेस ने जीते थे और इन्हीं बूथों को इस ऑपरेशन में टारगेट किया गया। उनका आरोप था कि यह सब केवल कर्नाटक या महाराष्ट्र तक सीमित नहीं है, बल्कि हरियाणा और यूपी जैसे कई राज्यों में भी इसी पैटर्न पर वोटिंग लिस्ट में गड़बड़ी की गई है।

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सत्ता और विपक्ष की प्रतिक्रियाएँ

बीजेपी सांसद रविशंकर प्रसाद ने राहुल गांधी के आरोपों को बेबुनियाद करार देते हुए कहा, “राहुल न कानून समझते हैं, न सुप्रीम कोर्ट के आदेश। उनके आरोप सिर्फ राजनीतिक नाटक हैं।”
वहीं, राहुल गांधी ने कहा, “हमारे पास सौ फीसदी पुख्ता सबूत हैं। चुनाव आयोग को OTP और मोबाइल डेटा जारी करना ही होगा। देश के लोकतंत्र को बचाने के लिए यह ज़रूरी है।”

आयोग का जवाब

चुनाव आयोग की ओर से शुरुआती प्रतिक्रिया में कहा गया कि “वोट ऑनलाइन डिलीट नहीं किए जा सकते और लगाए गए आरोप आधारहीन हैं।” आयोग का दावा है कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और नियमों के तहत होती है।

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