भोपाल : राजधानी भोपाल में नगर निगम की सी एंड डी (कंस्ट्रक्शन एंड डेमोलिशन) प्लांट पर शुक्रवार को महापौर मालती राय ने औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण का उद्देश्य न केवल प्लांट में प्रतिदिन बनने वाली सामग्री जैसे चूरा, गिट्टी, ईंट और पेविंग ब्लॉक की मात्रा और गुणवत्ता को परखना था, बल्कि यह देखना भी था कि वर्षा ऋतु में उत्पादन की दक्षता और वितरण में कोई व्यवधान तो नहीं आ रहा।
स्थानीय सूत्रों और अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, थुआखेड़ा प्लांट में उत्पादन क्षमता वर्षा ऋतु के दौरान घट जाती है, लेकिन निरीक्षण के दिन भी लगभग 2.50 लाख ईंटें स्टॉक में उपलब्ध थीं। महापौर ने बताया कि वर्षा ऋतु में प्लांट रोज़ाना 6-7 घंटे संचालित होता है, जबकि सामान्य दिनों में यह 8-10 घंटे चलता है।
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निरीक्षण के दौरान महापौर ने कर्मचारियों से उत्पादन प्रक्रिया की विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने विशेष रूप से यह जांच की कि चूरा और गिट्टी का निर्माण पर्यावरण मानकों के अनुसार हो रहा है या नहीं। महापौर ने कहा, “सी एंड डी से बनने वाली सामग्री न केवल बाजार में सस्ती उपलब्ध होती है, बल्कि यह निर्माण क्षेत्र में कचरे का पुन: उपयोग कर पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देती है।”
उत्पादन और उपयोग में बाधाएँ
प्लांट में मौजूद अधिकारियों ने बताया कि वर्षा ऋतु में कच्चे माल की उपलब्धता और मशीनरी संचालन में तकनीकी समस्याओं के कारण उत्पादन क्षमता में कमी आती है। इसके बावजूद, थुआखेड़ा प्लांट ने निरंतर उत्पादन जारी रखा है।
स्थानीय ठेकेदारों और बाजार से मिली जानकारी के अनुसार, प्लांट से मिलने वाली सामग्री की कीमत सामान्य बाजार दर से कम है, जिससे छोटे निर्माण और सड़क परियोजनाओं में लाभ होता है। हालांकि, इन्वेस्टिगेशन के दौरान यह पता चला कि कुछ दिन उत्पादन और स्टॉक प्रबंधन में असंगति भी देखने को मिली, जिस पर प्रशासन ने कड़ी निगरानी रखने का निर्णय लिया है।
प्रशासनिक पहल और भविष्य की योजना
निरीक्षण के दौरान महापौर ने निर्देश दिए कि प्लांट की उत्पादन प्रक्रिया और स्टॉक का रिकॉर्ड डिजिटल माध्यम से अपडेट किया जाए, ताकि किसी भी समय वास्तविक स्थिति का पता चल सके। महापौर के साथ निरीक्षण में परिषद सदस्य आर.के. सिंह बघेल, डॉ. पी.पी. सिंह और अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
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महापौर ने कहा, “नगर निगम इस प्रकार की पहल के माध्यम से न केवल शहर में निर्माण सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और लागत में कमी को भी प्राथमिकता देगा। भविष्य में हम प्लांट की क्षमता बढ़ाने और वर्षा ऋतु में भी उत्पादन सुचारू रूप से चलाने के लिए तकनीकी उन्नयन पर ध्यान देंगे।”
प्लांट में मौजूद कर्मचारियों के अनुसार, उत्पादन में बाधाओं के बावजूद ठेका और संचालन टीम ने निरंतर काम किया। कुछ कर्मचारियों ने बताया कि वर्षा ऋतु में मशीनरी की रख-रखाव और सामग्री के सूखे रखने के लिए अतिरिक्त प्रयास करना पड़ता है।











