रायपुर : छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल 19वें दिन भी जारी है। राज्य में मौसमी बीमारियों का प्रकोप बढ़ने के बीच हड़ताल से शहरी और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं पर गहरा असर पड़ा है।
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संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमित मिरी और प्रदेश प्रवक्ता पूरन दास ने बताया कि 16,000 से अधिक NHM कर्मचारियों ने अपनी 10 सूत्री मांगों को लेकर 18 अगस्त से आंदोलन शुरू किया था। संघ का कहना है कि विधानसभा चुनाव 2023 के दौरान भाजपा ने संविदा कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान करने का वादा किया था, लेकिन सरकार बनने के 20 महीने और 160 से अधिक ज्ञापन देने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
- संविलियन जॉब सुरक्षा
- पब्लिक हेल्थ कैडर की स्थापना
- ग्रेड पे निर्धारण
- कार्यमूल्यांकन पद्धति में सुधार
- लंबित 27% वेतन वृद्धि
- नियमित भर्ती में सीटों का आरक्षण
- अनुकंपा नियुक्ति
- मेडिकल/अन्य अवकाश की सुविधा
- स्थानांतरण नीति
- न्यूनतम 10 लाख चिकित्सा बीमा
संघ ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल द्वारा पांच मांगों पर सहमति जताने के बावजूद, ट्रांसफर नीति, सीआर व्यवस्था, कैशलेस बीमा, लंबित वेतन वृद्धि और सवैतनिक अवकाश में पर्याप्त सुधार नहीं हुआ है। संघ का आरोप है कि राज्य सरकार केवल दिखावटी उपाय कर रही है और संविदा कर्मचारियों की मुख्य मांगों को अनदेखा किया जा रहा है।
हड़ताल का असर:
हड़ताल के कारण पोषण पुनर्वास केंद्र, स्कूल और आंगनबाड़ी में बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण, टीबी-मलेरिया जांच, प्रसव कार्य, टीकाकरण और नवजात स्वास्थ्य केंद्र जैसी सेवाएं प्रभावित हुई हैं।
कर्मचारी संघ ने उच्च अधिकारियों के साथ चर्चा के बाद भी कोई समाधान न मिलने पर राज्य स्वास्थ्य भवन का घेराव किया और चेतावनी पत्र जलाया। 4 सितंबर को संघ के बचे हुए जिला और प्रदेश स्तरीय पदाधिकारियों ने सामूहिक त्यागपत्र देकर आंदोलन तेज करने की घोषणा की।
संघ का कहना है कि यदि सरकार ने संविदा कर्मचारियों की मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की, तो आंदोलन और अधिक उग्र होने की संभावना है।












