नई दिल्ली। भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को अनंत चतुर्दशी के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन किए गए विशेष उपाय और पूजा से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। पावन अवसर पर भक्तों को बैकुंठ धाम में स्थान पाने का मार्ग भी सुगम होता है।
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धर्मशास्त्रों के अनुसार, बैकुंठ धाम भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का मुख्य निवास स्थान है, जहां पुण्य आत्माएं जन्म-मरण के चक्र से मुक्त होकर अनंत काल तक उनकी सेवा करती हैं। बुरे कर्म और पाप करने वाले व्यक्ति को इस पावन धाम में प्रवेश नहीं मिलता। केवल भगवान के भक्त और पुण्यात्माएं ही इस अलौकिक धाम में स्थान पा सकती हैं।
साल 2025 में अनंत चतुर्दशी का पर्व 6 सितंबर, शनिवार को मनाया जाएगा। इस दिन सुबह घर के मंदिर में एक चौकी रखें और उसके ऊपर लाल कपड़ा बिछाकर विष्णु जी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। लाल रंग के सूत्र में 14 गांठें बांधकर उसे भगवान के चरणों में अर्पित करें। पीले कपड़े, फल, फूल, पीले अक्षत और मिठाई अर्पित करें। पूजा के दौरान घी का दीपक जलाएं और आरती कर समापन करें।
पवित्र अनंत सूत्र को दाहिने हाथ पर बांधकर रखें और अगले दिन इसे किसी पवित्र नदी में प्रवाहित कर दें। इस दौरान ब्रह्मचर्य और मानसिक शुद्धता का पालन आवश्यक है। शास्त्रों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति 14 वर्षों तक इस विधि से अनंत चतुर्दशी का व्रत करता है, तो उसे विष्णु और लक्ष्मी जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
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भक्तों का मानना है कि इस उपाय से न केवल आर्थिक और पारिवारिक सुख-समृद्धि बढ़ती है, बल्कि मोक्ष की प्राप्ति और बैकुंठ धाम में स्थान पाने का मार्ग भी प्रशस्त होता है। इस पावन दिन भक्त अपनी भक्ति और श्रद्धा से जीवन को धन्य बना सकते हैं।










