EV चार्जिंग स्टेशन बिज़नेस : निवेश, चार्जिंग रेट और प्रॉफिट मार्जिन की पूरी गाइड

VIKASH KHALKHO

इन दिनों भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का चलन तेजी से बढ़ रहा है। सरकार भी ईवी को बढ़ावा देने के लिए नीतियां बना रही है। इसी वजह से शहरों और कस्बों में इलेक्ट्रिक वाहनों के चार्जिंग स्टेशन तेजी से खुल रहे हैं। अब सवाल यह है कि इन चार्जिंग स्टेशनों से कितनी कमाई होती है और कोई व्यक्ति इसे कैसे शुरू कर सकता है।

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पेट्रोल पंप, होटल, रेस्टोरेंट और ऑफिस कॉम्प्लेक्स के पास अब ईवी चार्जिंग की सुविधा आसानी से देखने को मिल जाती है। यहां वाहन मालिकों से प्रति यूनिट के हिसाब से शुल्क लिया जाता है, ठीक वैसे ही जैसे पेट्रोल पंप पर प्रति लीटर के हिसाब से पेट्रोल और डीजल मिलता है।

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ईवी चार्जिंग स्टेशन मुख्य रूप से दो तरह के होते हैं—एसी और डीसी। एसी चार्जिंग अपेक्षाकृत धीमी होती है, जबकि डीसी चार्जिंग फास्ट होती है। डीसी चार्जर से कार या एसयूवी लगभग एक से डेढ़ घंटे में चार्ज हो जाती है। वहीं एसी चार्जर से ई-रिक्शा और टू-व्हीलर चार्ज किए जाते हैं, जिसमें पांच से छह घंटे लगते हैं।

दर की बात करें तो डीसी चार्जिंग का शुल्क 15 से 25 रुपये प्रति यूनिट तक होता है, जबकि एसी चार्जिंग का शुल्क आमतौर पर 8 से 12 रुपये प्रति यूनिट रहता है। चार्जिंग स्टेशन चलाने वाले व्यक्ति को औसतन 7 रुपये प्रति यूनिट बिजली बिल के रूप में चुकाने होते हैं। यदि ग्राहक से 20 रुपये प्रति यूनिट वसूले जा रहे हैं तो बिजली खर्च और मेंटेनेंस काटने के बाद लगभग 11 रुपये प्रति यूनिट का लाभ बचता है।

एक चार्जिंग स्टेशन शुरू करने में करीब 10 लाख रुपये का निवेश करना होता है। इस लागत में 30 किलोवाट का सिंगल गन डीसी चार्जर लगाया जा सकता है। डबल गन चार्जर के लिए 18 लाख रुपये तक खर्च आता है। एसी चार्जिंग स्टेशन comparatively सस्ता पड़ता है।

कंपनी की ओर से चार्जिंग स्टेशन की ऑपरेटिंग, मीटर और सेटअप की सुविधा दी जाती है। स्टेशन पर अलग से मैनपावर की जरूरत नहीं होती। वाहन चालक खुद ही चार्जिंग मशीन का उपयोग करते हैं।

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चार्जिंग दरें स्थान के आधार पर भी बदलती हैं। जहां चार्जिंग की ज्यादा मांग है या आसपास स्टेशन नहीं है, वहां प्रति यूनिट दर अधिक होती है। वहीं प्रतिस्पर्धा वाले क्षेत्रों में यह दर अपेक्षाकृत कम होती है।

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चार्जिंग स्टेशन खोलने से पहले जगह का चुनाव और चार्जर का प्रकार तय करना जरूरी होता है। हाईवे या रेस्टोरेंट के पास फास्ट चार्जिंग की मांग अधिक रहती है, जबकि होटल या लॉज के पास स्लो चार्जिंग की सुविधा ग्राहकों को ज्यादा आकर्षित करती है।

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विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।
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