खरोरा में हलषष्ठी पर्व : हलषष्ठी, जिसे ग्रामीण अंचलों में कमरछठ पर्व के नाम से भी जाना जाता है, बड़े ही हर्षोल्लास और भक्ति के साथ मनाया गया। इस दिन घर के आंगन में मिट्टी खोदकर सगरी बनाई जाती है, जिसमें माताएं भगवान शिव, बलराम, गणेश और कार्तिक की पूजा-अर्चना कर संतान के सुख और समृद्धि की कामना करती हैं।
भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी को मनाए जाने वाले इस पर्व को लेकर श्रद्धालुओं में भक्ति और उत्साह का माहौल रहता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखकर विधि-विधान से पूजा करने से संतान को सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।
इस अवसर पर घर के आंगन या मंदिर में मिट्टी खोदकर सगरी बनाई जाती है और भगवान शिव व बलराम की पूजा-अर्चना कर मंगलकामनाएँ की जाती हैं। महिलाएं व्रत से जुड़ी कथा का श्रवण भी करती हैं। कई मंदिरों में महिलाएं सामूहिक रूप से पूजा करती हैं।
हलषष्ठी पूजा में पसहर चावल और छह प्रकार की भाजी का विशेष महत्व है। इस दिन बिना हल से उपजे हुए अनाज (पसहर चावल), भैंस का दूध, दही सहित अन्य पूजा सामग्री का उपयोग किया जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान कृष्ण के बड़े भाई बलराम का जन्मदिन भी होता है, इसलिए हल से जुताई हुई फसल और अन्य पूजा सामग्री का उपयोग नहीं किया जाता।
पर्व में सगरी पर जल अर्पित कर भक्ति भाव से पूजा अर्चना की जाती है और यह पूरे क्षेत्र में उल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।













