MP News : रीवा। राज्य में महिला सुरक्षा को लेकर किए जा रहे सरकारी दावों की पोल एक बार फिर खुल गई है। सेमरिया थाना क्षेत्र में बोर्ड परीक्षा में 95 प्रतिशत अंक लाने वाली और उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल के हाथों सम्मानित हो चुकी छात्रा के साथ गैंगरेप का मामला सामने आया है। दरिंदों ने छात्रा को आठ दिनों तक बंधक बनाए रखा और बुधवार देर रात अर्धमूर्छित हालत में उसके घर के पास फेंक कर फरार हो गए।
पीड़िता को गंभीर हालत में गांधी मेमोरियल अस्पताल के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों ने इसे “ब्रूटल गैंगरेप” करार दिया है। फिलहाल छात्रा की हालत स्थिर बताई गई है। पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि दो अन्य की तलाश जारी है।
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कोचिंग के लिए निकली थी, रास्ते में बंधक बनाकर ले गए
परिजनों के अनुसार 31 जुलाई को छात्रा कोचिंग के लिए घर से निकली थी। रास्ते में तीन युवकों ने उसका पीछा कर उसे जबरन अगवा कर लिया। छात्रा ने विरोध करते हुए हाथापाई की, लेकिन आरोपी उसे बेहोश कर किसी अज्ञात स्थान पर ले गए और आठ दिनों तक उसे बंधक बनाए रखा। जब वह रात तक घर नहीं लौटी, तो परिजनों ने सेमरिया थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।
इस मामले में नया मोड़ तब आया जब मुख्य आरोपी के पिता ने उल्टा अपने बेटे की गुमशुदगी और अपहरण का मामला दर्ज कराया। बताया जा रहा है कि आरोपी का परिवार राजनीतिक रूप से प्रभावशाली है। इससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि राजनीतिक दबाव में जांच को भटकाने की कोशिश की जा रही है।
ब्रूटल गैंगरेप, इसलिए गायनिक वार्ड में भर्ती: डॉक्टर
अस्पताल अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा ने बताया, “सामान्य दुष्कर्म मामलों में पीड़िता को ऑब्जर्वेशन में नहीं रखा जाता, लेकिन इस केस में हालात अत्यंत असामान्य और संवेदनशील हैं, इसलिए पीड़िता को स्त्री रोग विभाग में भर्ती किया गया है।”
परिवार का दर्द: बहन हौसले से भरी थी, लेकिन हैवानियत के आगे हार गई
पीड़िता के भाई ने बताया, “हमारी बहन पढ़ाई में टॉपर थी। गायन और वादन में भी उसकी प्रतिभा उत्कृष्ट थी। खुद मुख्यमंत्री मंच से उसे सम्मानित कर चुके हैं। अब वही बहन अस्पताल में जिंदगी से जंग लड़ रही है। हम सिर्फ न्याय चाहते हैं।”
क्या महिला सुरक्षा सिर्फ भाषणों तक सीमित रह गई है?
अब सवाल उठता है कि जब एक सम्मानित छात्रा तक सुरक्षित नहीं है, तो आम बेटियां कैसी सुरक्षा की उम्मीद करें? क्या महिला सुरक्षा केवल नारे और भाषणों में सिमट कर रह गई है?









