Mp news:श्योपुर जिले में अवैध रेत उत्खनन का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। चंबल नदी से अवैध रेत परिवहन करते हुए पकड़ी गई तीन ट्रैक्टर ट्रॉलियों को छोड़ने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। वायरल वीडियो को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है और लोग पुलिस तथा रेत माफियाओं के बीच कथित गठजोड़ की बात कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार बीरपुर थाना पुलिस ने चंबल नदी से अवैध रेत भरकर ले जा रही तीन ट्रैक्टर ट्रॉलियों को पकड़ा था। इसके बाद तीनों वाहनों को थाना क्षेत्र के पांचों नहर के पास करीब एक घंटे तक खड़ा रखा गया। बताया जा रहा है कि इस दौरान थाना प्रभारी के पहुंचने का इंतजार किया जा रहा था।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुछ समय बाद थाना प्रभारी मौके पर पहुंचे और इसके बाद तीनों ट्रैक्टर ट्रॉलियों को छोड़ दिया गया। इसी घटनाक्रम का वीडियो किसी स्थानीय व्यक्ति ने मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
वायरल वीडियो में पुलिसकर्मी और थाना स्टाफ कथित रूप से ट्रैक्टर चालकों से बातचीत करते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब पुलिस ने अवैध रेत से भरे वाहनों को पकड़ा था तो उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई क्यों नहीं की गई। कई लोगों का आरोप है कि पैसे लेकर ट्रैक्टर ट्रॉलियों को छोड़ दिया गया।
हालांकि वायरल वीडियो की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन सोशल मीडिया पर लोग इसे बीरपुर थाना पुलिस की कार्यप्रणाली से जोड़कर देख रहे हैं। वीडियो में दिखाई दे रहे पुलिसकर्मियों को थाना प्रभारी और स्टाफ बताया जा रहा है।
चंबल क्षेत्र में लंबे समय से अवैध रेत उत्खनन और परिवहन का मुद्दा चर्चा में रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि रेत माफिया लगातार सक्रिय हैं और प्रशासनिक कार्रवाई के बावजूद अवैध खनन पर पूरी तरह रोक नहीं लग पा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिकायतों के बाद भी प्रभावी कार्रवाई नहीं होती, जिससे माफियाओं के हौसले बुलंद बने हुए हैं।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद अब लोग पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। नागरिकों का कहना है कि यदि पुलिसकर्मियों की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं कुछ लोगों ने मामले की जांच किसी वरिष्ठ अधिकारी से कराने की मांग भी उठाई है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वायरल वीडियो के बाद प्रशासन कोई ठोस कदम उठाएगा या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह समय के साथ ठंडे बस्ते में चला जाएगा।









