Breaking News : मितानिनों ने सरकार से पूछा बड़ा सवाल : छत्तीसगढ़ के पांचों संभाग तक हड़कंप…वीडियो वायरल

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Breaking News : रायपुर | छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य क्षेत्र में मितानिनों का आंदोलन अब और ज़ोर पकड़ने लगा है। नवा रायपुर से शुरू होकर यह आंदोलन राज्य के पांचों संभागों तक फैल चुका है। मितानिनों ने सरकार से सीधे सवाल किए हैं — ‘वादा पूरा करो या जवाब दो’। उनकी प्रमुख मांगें संविलियन, नियमित वेतन भुगतान और उचित सम्मान से जुड़ी हैं। पिछले 13 महीनों से मितानिनों का वेतन बकाया है, जिस कारण वे थक हार कर संघर्ष के लिए मजबूर हो गए हैं।

Breaking News : मितानिनों ने NGO मॉडल के तहत काम करने और ठेका प्रथा को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि इस तरह की व्यवस्था स्वास्थ्य सेवा को कमजोर करती है और उन्हें न्याय नहीं मिलता। मितानिनों का जोर है कि उन्हें स्थायी संविलियन के साथ सरकारी वेतनमान पर काम करना चाहिए ताकि वे समाज की सेवा बेहतर तरीके से कर सकें।

इस आंदोलन की शुरुआत नवा रायपुर से हुई, जहां मितानिनों ने धरना प्रदर्शन किया। इसके बाद यह आंदोलन तेजी से राज्य के अन्य जिलों और संभागों तक फैल गया। मितानिनों ने सड़क पर उतर कर प्रदर्शन, हड़ताल और अन्य संघर्ष के माध्यम से अपनी मांगों को सरकार के सामने रखा है। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे आंदोलन जारी रखेंगे।

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सरकार पर इस आंदोलन का दबाव लगातार बढ़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कहा है कि वे मितानिनों की समस्याओं को समझते हैं और जल्द समाधान निकालने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है। वहीं, मितानिनों का कहना है कि केवल वादों से काम नहीं चलेगा, उन्हें असल में न्याय और स्थायी व्यवस्था चाहिए।

इस आंदोलन के कारण कई स्वास्थ्य केंद्रों में काम प्रभावित हुआ है, जिससे ग्रामीण जनता को स्वास्थ्य सेवाएं मिलने में परेशानी हो रही है। हालांकि, मितानिनों ने कहा है कि वे जनता की सेवा करना चाहते हैं, लेकिन बिना वेतन और सम्मान के उनका काम करना मुश्किल है।

मितानिनों की यह लड़ाई छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य प्रणाली में सुधार की मांग का भी प्रतीक है। वे चाहते हैं कि सरकार उन्हें रोजगार का स्थायी अधिकार दे, ताकि वे निश्चिंत होकर अपने काम में जुट सकें। यह आंदोलन न केवल मितानिनों के लिए, बल्कि पूरे स्वास्थ्य विभाग के लिए एक बड़ा बदलाव लेकर आ सकता है।

अंततः यह कहना सही होगा कि मितानिनों का यह महाआंदोलन सरकार के लिए चुनौती है। अगर समय रहते उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह संघर्ष और भी बड़ा रूप ले सकता है। इसलिए अब सरकार के लिए जरूरी हो गया है कि वे मितानिनों की बात गंभीरता से सुनें और जल्द ही ठोस कदम उठाएं।

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