WhatsApp Tests Age Verification in India: अगले साल से लागू होगा DPDP कानून; व्हाट्सऐप पर आया डेट ऑफ बर्थ (DOB) वेरिफाई करने का नया फीचर

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WhatsApp Tests Age Verification in India: नई दिल्ली)। मैसेजिंग प्लेटफॉर्म व्हाट्सऐप (WhatsApp) ने भारत में अपने यूजर्स के लिए ‘एज वेरिफिकेशन’ (उम्र की पुष्टि) फीचर की टेस्टिंग शुरू कर दी है। हाल ही में कई यूजर्स को ऐप पर उनकी जन्मतिथि (Date of Birth) दर्ज करने का ऑप्शन दिखाई देने लगा है, जिसके नीचे लिखा है कि भारत के आगामी कानूनों का पालन करने के लिए यह जानकारी मांगी जा रही है।

यह कदम भारत सरकार द्वारा पारित डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) एक्ट, 2023 के अनुपालन के तहत उठाया जा रहा है। इस कानून के तहत 18 वर्ष से कम आयु के प्रत्येक नागरिक को ‘बच्चा’ माना गया है, और उनके पर्सनल डेटा को कलेक्ट (एकत्रित) या प्रोसेस करने से पहले माता-पिता या कानूनी अभिभावक की सत्यापित सहमति (Verifiable Parental Consent) लेना अनिवार्य किया गया है।

मेटा (Meta) की ओर से स्पष्ट किया गया है कि यह एक प्राइवेसी-प्रोटेक्टिव टेस्टिंग है, जिससे आम यूजर्स के चैट या ऐप एक्सपीरियंस पर कोई असर नहीं पड़ेगा। यूजर द्वारा दी गई उम्र की जानकारी पूरी तरह गोपनीय रहेगी और अन्य यूजर्स के साथ साझा नहीं की जाएगी।

प्रमुख बिंदु / नियम DPDP एक्ट 2023 एवं व्हाट्सऐप वेरिफिकेशन की पूरी जानकारी
सुविधा का नाम व्हाट्सऐप एज वेरिफिकेशन (WhatsApp Age Verification Test)
कानूनी आधार डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) एक्ट, 2023 (धारा 9)
लागू होने की समय-सीमा बाल सुरक्षा से जुड़े प्रावधान मई 2027 से अनिवार्य होंगे
नाबालिग की परिभाषा 18 वर्ष से कम आयु का कोई भी डिजिटल यूजर
सहमति प्रक्रिया माता-पिता या लीगल गार्डियन की सत्यापित पहचान के बाद मंजूरी
सत्यापन के तरीके

1. प्लेटफॉर्म का मौजूदा सत्यापित रिकॉर्ड


2. सरकारी पहचान पत्र (Govt Identity Doc)

DPDP एक्ट के तहत न केवल बच्चों की सहमति अनिवार्य की गई है, बल्कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को यह भी वेरिफाई करना होगा कि सहमति देने वाला व्यक्ति वास्तव में बच्चे का अभिभावक है या नहीं। इसके लिए अभिभावकों की उम्र (18 वर्ष से अधिक) और पहचान की पुष्टि सरकारी दस्तावेजों या प्लेटफॉर्म के मौजूदा वेरिफाइड रिकॉर्ड के जरिए की जाएगी।

विश्वभर में बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर कड़े नियम लागू किए जा रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया सहित कई देश 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया ऐप्स को प्रतिबंधित कर चुके हैं। भारत में भी डीपीडीपी एक्ट के जरिए ऑनलाइन स्पेस में नाबालिगों के डेटा गोपनीयता और सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है।

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