Tarun Tejpal Convicted: तहलका मैगजीन के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को 13 साल पुराने यौन उत्पीड़न मामले में बड़ा कानूनी झटका लगा है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने गोवा ट्रायल कोर्ट के बरी करने वाले फैसले को पलटते हुए उन्हें दोषी करार दिया है। यह मामला वर्ष 2013 का है, जिसमें एक महिला पत्रकार ने होटल की लिफ्ट में यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था।
बॉम्बे हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने तीन दिन तक चली अंतिम सुनवाई के बाद 30 जुलाई को फैसला सुरक्षित रखा था। गुरुवार, 6 अगस्त 2026 को अदालत ने अपना निर्णय सुनाते हुए निचली अदालत के फैसले को बदल दिया।
2013 में सामने आया था मामला
यह मामला नवंबर 2013 का है। आरोप है कि गोवा के एक होटल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान एक महिला पत्रकार के साथ होटल की लिफ्ट में यौन उत्पीड़न हुआ था। शिकायत में महिला ने तरुण तेजपाल पर गंभीर आरोप लगाए थे।मामला सामने आने के बाद तरुण तेजपाल ने तहलका मैगजीन के संपादक पद से इस्तीफा दे दिया था। बाद में पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया था।
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गोवा ट्रायल कोर्ट ने किया था बरी
मामले की सुनवाई कई वर्षों तक चली। वर्ष 2017 में ट्रायल शुरू हुआ और बाद में गोवा सेशंस कोर्ट ने सबूतों के आधार पर तरुण तेजपाल को बरी कर दिया था।इस फैसले को चुनौती देते हुए पीड़िता ने हाईकोर्ट का रुख किया था। हाईकोर्ट में मामले की अंतिम सुनवाई 30 जुलाई 2026 को पूरी हुई, जिसके बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।
हाईकोर्ट ने पलटा निचली अदालत का फैसला
जस्टिस डॉ. नीला गोखले और जस्टिस अमित जामदार की बेंच ने गुरुवार को अपना फैसला सुनाते हुए ट्रायल कोर्ट के निर्णय को पलट दिया और तरुण तेजपाल को दोषी ठहराया।अदालत के विस्तृत आदेश और सजा से संबंधित आगे की कानूनी प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार पूरी की जाएगी।
आगे क्या होगा?
हाईकोर्ट द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद अब मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया चलेगी। विस्तृत आदेश के आधार पर सजा और अन्य पहलुओं पर अदालत की अगली कार्रवाई होगी। वहीं, दोषसिद्धि के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का विकल्प भी कानूनी रूप से उपलब्ध रहता है।




