Corporate insolvency : नई दिल्ली। अनिल धीरूभाई अंबानी समूह की कंपनी रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड को राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने कंपनी के खिलाफ जारी कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) पर अस्थायी रोक लगा दी है।
कंपनी ने शेयर बाजार को दी गई आधिकारिक फाइलिंग में बताया कि उसने 30 मई, 2025 के NCLT आदेश के विरुद्ध अपील दायर की थी, जिस पर सुनवाई करते हुए NCLAT ने अंतरिम राहत प्रदान की है। अब इस मामले में अगली सुनवाई 27 अगस्त 2025 को होगी।
कर्ज हुआ शून्य, निवेशकों में दिखा भरोसा
रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर ने हाल ही में अपनी वित्तीय स्थिति को सुदृढ़ करते हुए वित्त वर्ष 2025 के दौरान 3,300 करोड़ रुपये का कर्ज चुका दिया है। कंपनी के अनुसार, वह अब स्टैंडअलोन नेट डेट ज़ीरो पर पहुंच गई है, यानी कंपनी पर अब कोई बकाया कर्ज नहीं है।
कंपनी के शेयरों में बीते दिनों तेजी देखने को मिली थी, हालांकि 17 जुलाई को यह गिरकर 390.45 रुपये के स्तर पर बंद हुए। जून और जुलाई में इसके स्टॉक्स ने करीब 30% का रिटर्न दिया है।
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पूंजी जुटाने की योजना
16 जुलाई को कंपनी ने शेयर बाजार को यह भी जानकारी दी थी कि वह QIP (Qualified Institutional Placement) और FPO के ज़रिए 9,000 करोड़ रुपये की पूंजी जुटाने जा रही है। इस राशि में से 6,000 करोड़ रुपये QIP/FPO और शेष 3,000 करोड़ रुपये नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स के जरिए जुटाए जाएंगे।
निवेशकों के लिए संकेत
NCLAT की इस राहत और कंपनी की ऋणमुक्त स्थिति के चलते निवेशकों में भरोसा बढ़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कंपनी अपनी कर्जमुक्त नीति और पूंजी जुटाने की प्रक्रिया को प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाती है, तो निकट भविष्य में रिलायंस इन्फ्रा के शेयरों में और भी मजबूती देखी जा सकती है।













