International News : दिल्ली | पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इस साल नोबेल शांति पुरस्कार मिल सकता है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने उन्हें इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए नोमिनेट किया है। नेतन्याहू की यह पहल ऐसे वक्त में हुई है जब गाज़ा पट्टी में संघर्ष विराम को लेकर अमेरिका और इजरायल मिलकर काम कर रहे हैं।
नेतन्याहू बोले – “शांति के लिए ट्रंप की भूमिका ऐतिहासिक”
नेतन्याहू ने वॉशिंगटन डीसी में ट्रंप से मुलाकात के दौरान उन्हें एक आधिकारिक पत्र सौंपा, जिसमें ट्रंप को नोबेल पीस प्राइज़ देने की सिफारिश की गई है। उन्होंने कहा, “डोनाल्ड ट्रंप ने कई युद्ध रोके, खासकर भारत-पाकिस्तान के बीच परमाणु टकराव जैसे हालात को शांतिपूर्ण तरीके से संभाला।”
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ट्रंप का दावा – “हमने युद्ध नहीं, समझौते कराए”
ट्रंप ने बातचीत के दौरान कहा, “हमने बहुत सी लड़ाइयां रोकी हैं – जैसे भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव। हमने साफ कहा था, जो लड़ाई करेगा, अमेरिका उसका सहयोग नहीं करेगा।”
मुलाकात रही गोपनीय
इस बार ट्रंप और नेतन्याहू की मुलाकात पूरी तरह प्राइवेट रही। न कोई प्रेस कांफ्रेंस, न कोई कैमरा। सिर्फ व्हाइट हाउस में ‘डिनर डिप्लोमेसी’ के जरिए दोनों नेताओं ने गाज़ा संघर्ष, ईरान पर संभावित हमला, और मिडिल ईस्ट में शांति प्रयासों पर चर्चा की।
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यूक्रेन को भेजेंगे और हथियार
डोनाल्ड ट्रंप ने साफ किया कि अमेरिका यूक्रेन को और हथियार भेजेगा, ताकि वो रूस के खिलाफ अपनी रक्षा कर सके। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान से टकराव की कोई योजना नहीं है, लेकिन अगर जरूरत पड़ी तो अमेरिका पीछे नहीं हटेगा।
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चीन को झटका, भारत को उम्मीद
वहीं ट्रंप ने चीन समेत 14 देशों पर 40% तक टैरिफ लगा दिए हैं, लेकिन भारत के लिए राहत की बात यह रही कि उन्होंने कहा – “हम भारत के साथ एक बड़ा व्यापार समझौता करने के करीब हैं।”
क्या ट्रंप वाकई नोबेल शांति पुरस्कार के हकदार हैं?
नेतन्याहू के इस प्रस्ताव के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छिड़ गई है। ट्रंप समर्थक इसे ऐतिहासिक बता रहे हैं, वहीं विरोधियों का कहना है कि ट्रंप की कई नीतियाँ विवादास्पद रही हैं।













