अंतरराष्ट्रीय desk। Nishaanebaz.com-BRICS Summit 2026 PM Modi Speech: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आधिकारिक तौर पर ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन 2026 का शुभारंभ करते हुए वैश्विक मंच से समावेशी विकास का बड़ा संदेश दिया है। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत और ब्रिक्स का विजन “सबको साथ लेकर चलने का है, हम किसी देश या समूह के खिलाफ नहीं हैं।” उन्होंने अगले 20 वर्षों के एजेंडे पर केंद्रित होकर काम करने और वैश्विक शासन प्रणाली के मौजूदा ढांचे में बड़े बदलावों की जरूरत पर जोर दिया।
글ॉबल गवर्नेंस के मौजूदा ढांचे पर सवाल उठाते हुए पीएम मोदी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय निर्णय लेने वाली व्यवस्था वर्तमान में एक पिरामिड जैसी बन गई है। सत्ता और प्रमुख फैसले लेने की शक्ति शीर्ष पर बैठे कुछ देशों तक सीमित है, जबकि निचले स्तर पर मौजूद विकासशील देश इन फैसलों से सीधे प्रभावित होने के बावजूद नीतियां बनाने में पूरी तरह असमर्थ रहते हैं। उन्होंने इस असमानता को दूर करने के लिए वैश्विक शासन में सुधार हेतु 10 सूत्रीय प्रस्ताव तैयार करने का सुझाव दिया, जिसे अगली समिट तक ‘BRICS सुधार रोडमैप’ के रूप में लागू किया जा सके।
#WATCH | Delhi: During the BRICS Summit 2026, Prime Minister Narendra Modi says, “While strengthening BRICS, we must also chart a course for global reform. The current structure of global governance resembles a pyramid: power and decision-making are concentrated at the top, while… pic.twitter.com/6Ksdy8LEF7
— ANI (@ANI) September 12, 2026
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संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले समुद्री नाविकों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि नाविक वैश्विक अर्थव्यवस्था को गति देते हैं, लेकिन संकट के समय उन्हें तुरंत मदद नहीं मिल पाती। इसके समाधान के लिए पीएम मोदी ने ‘नाविकों के लिए आपातकालीन सहायता नेटवर्क’ बनाने का प्रस्ताव रखा। यह नेटवर्क संबंधित देशों के राजनयिक मिशनों और समुद्री अधिकारियों के बीच सीधा संपर्क स्थापित करेगा, जिससे संकट के समय त्वरित चिकित्सा सहायता और लोगों को सुरक्षित निकालने में मदद मिलेगी।
संयुक्त राष्ट्र (UN) के ढांचे पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधारों को अब और टाला नहीं जा सकता।’ इस मामले में बातचीत को एक समय-सीमा और स्पष्ट परिणामों से जोड़ा जाना आवश्यक है। इसके साथ ही उन्होंने अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में वोटिंग अधिकार और नीतियां तय करने की शक्तियों को आज की वास्तविक आर्थिक स्थिति के अनुरूप बनाने की मांग की, ताकि वैश्विक आर्थिक वृद्धि को दिशा देने वाले देशों को निर्णय लेने की प्रक्रिया में उनका जायज अधिकार मिल सके।







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