MP News: उज्जैन में 1.5% मंडी शुल्क बना बड़ा विवाद, व्यापारियों के साथ सड़क पर उतरी कांग्रेस

Rahul Goshwami

Mandi Shulk Vridhi Protest: मंडी शुल्क वृद्धि विरोध को लेकर मध्य प्रदेश में राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। उज्जैन में कांग्रेस उद्योग एवं व्यापार प्रकोष्ठ के नेतृत्व में व्यापारियों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री के नाम मंडी सचिव को ज्ञापन सौंपते हुए मंडी शुल्क बढ़ाने का निर्णय वापस लेने की मांग की।

मंडी शुल्क वृद्धि विरोध के तहत शुक्रवार को बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और व्यापारी मंडी गेट पर एकत्र हुए। यहां से रैली निकालकर सभी मंडी कार्यालय पहुंचे। पूरे रास्ते सरकार के खिलाफ नारे लगाए गए और शुल्क बढ़ाने के फैसले का विरोध दर्ज कराया गया।इसके बाद उद्योग एवं व्यापार प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष वरुण शर्मा के नेतृत्व में मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन मंडी सचिव को सौंपा गया।

कांग्रेस ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
मंडी शुल्क वृद्धि विरोध के दौरान कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार किसानों और व्यापारियों के हितों की लगातार अनदेखी कर रही है। उनका कहना है कि मंडी शुल्क को 1.5 प्रतिशत किए जाने से व्यापार की लागत बढ़ेगी और इसका सीधा असर किसानों, छोटे व्यापारियों तथा आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।नेताओं ने कहा कि यदि व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ेगा तो इसका असर कृषि उपज की कीमतों पर भी दिखाई देगा।

किसानों और व्यापारियों पर बढ़ सकता है आर्थिक दबाव
मंडी शुल्क वृद्धि विरोध के दौरान नेताओं ने दावा किया कि बढ़ा हुआ मंडी शुल्क किसानों के लिए भी चिंता का विषय है। उनका कहना है कि व्यापार लागत बढ़ने से किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलने में मुश्किल हो सकती है।साथ ही उपभोक्ताओं तक पहुंचने वाले कृषि उत्पाद भी महंगे हो सकते हैं, जिससे महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका जताई गई।
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ज्ञापन में रखी गईं ये प्रमुख मांगें
मंडी शुल्क वृद्धि विरोध के तहत सौंपे गए ज्ञापन में सरकार से कई मांगें की गई हैं। इनमें प्रमुख रूप से कहा गया है कि मंडी शुल्क को 1.5 प्रतिशत किए जाने का फैसला तत्काल वापस लिया जाए।इसके अलावा व्यापारिक संगठनों, किसान प्रतिनिधियों और अन्य संबंधित पक्षों से चर्चा कर नई नीति तैयार करने की मांग भी रखी गई। कांग्रेस का कहना है कि भविष्य में किसी भी प्रकार की शुल्क वृद्धि से पहले सभी हितधारकों से विस्तृत विचार-विमर्श किया जाना चाहिए।

सरकार के फैसले पर बढ़ सकता है दबाव
मंडी शुल्क वृद्धि विरोध के बाद यह मुद्दा अब राजनीतिक रूप से भी अहम बनता जा रहा है। कांग्रेस का कहना है कि यदि सरकार ने फैसला वापस नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।फिलहाल सरकार की ओर से इस प्रदर्शन और ज्ञापन पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार अपने फैसले पर कायम रहती है या व्यापारियों और किसानों की मांगों को देखते हुए इसमें कोई बदलाव करती है।

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