छतरपुर (मध्य प्रदेश)। प्रसिद्ध धार्मिक स्थल बागेश्वर धाम में आयोजित नौ दिवसीय गुरु पूर्णिमा महोत्सव के अंतर्गत आज एक अत्यंत अलौकिक और दुर्लभ आध्यात्मिक अवसर का शुभारंभ हुआ। धाम में 22 से 30 जुलाई तक चल रहे इस महामहोत्सव के बीच संन्यासी बाबा की सिद्ध समाधि स्थल से उनकी पावन पादुकाओं के त्रिदिवसीय दर्शन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। वर्ष में केवल गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर ही बाहर लाई जाने वाली इन दिव्य पादुकाओं के दर्शन के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा है।
नेपाल शिष्य मंडल की सेवा में निकली भव्य शोभायात्रा
सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा, गुरु दीक्षा समारोह एवं शिष्य मिलन कार्यक्रम के मध्य संन्यासी बाबा के सिद्ध समाधि स्थल से उनकी पावन पादुकाओं की एक भव्य और विशाल शोभायात्रा निकाली गई। इस दिव्य यात्रा का नेतृत्व नेपाल बागेश्वर धाम शिष्य मंडल ने किया।
शोभायात्रा में हजारों की संख्या में श्रद्धालु, धाम के पुजारी, आचार्य, सेवादार और विभिन्न संप्रदायों के संतजन शामिल हुए। रथ, सुसज्जित घोड़ों, ढोल-नगाड़ों, मधुर भक्ति भजनों और “जय श्री बागेश्वर बालाजी” व “संन्यासी बाबा की जय” के गगनभेदी जयघोषों के साथ यात्रा आगे बढ़ी। इस दौरान पूरे शोभायात्रा मार्ग पर ड्रोन कैमरों के माध्यम से पुष्पवर्षा की गई, जिसने संपूर्ण वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
स्वच्छता और सेवा का अनूठा संदेश
इस भव्य शोभायात्रा के अग्रभाग में इंदौर सुंदरकांड मंडल की महिलाओं ने विशेष सेवा भाव का प्रदर्शन किया। महिलाओं ने यात्रा के आगे झाड़ू लगाकर स्वच्छता और सेवा का अनुपम संदेश दिया। श्रद्धालु हाथों में भगवा ध्वज थामे पूर्ण उत्साह और अटूट श्रद्धा के साथ यात्रा में कदम ताल करते दिखाई दिए।
मस्तक पर पादुकाएं धारण कर मंच पर की स्थापना
शोभायात्रा जब मुख्य कथा पंडाल पहुंची, तो वहां भावुक और भक्तिपूर्ण माहौल देखने को मिला। पीठाधीश्वर बागेश्वर सरकार (पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री) ने संन्यासी बाबा की पावन पादुकाओं को पूर्ण श्रद्धा और नमन के साथ अपने मस्तक पर धारण किया।
इसके पश्चात, आचार्यों द्वारा किए गए वेद मंत्रोच्चार, शंखनाद और पूरे विधि-विधान से पूजन-अर्चन के बीच पादुकाओं को एक विशेष रूप से सजाए गए मंच पर श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ स्थापित किया गया। दर्शन व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए जिग-जैग बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई है, जिससे भक्त बिना किसी असुविधा के दर्शन प्राप्त कर रहे हैं।
वर्ष में केवल एक बार मिलता है यह दुर्लभ अवसर
उल्लेखनीय है कि संन्यासी बाबा की पावन पादुकाएं पूरे वर्ष अपने सिद्ध समाधि स्थल पर ही विराजमान रहती हैं, जहां श्रद्धालु दूर से ही नमन करते हैं। संपूर्ण वर्ष में केवल गुरु पूर्णिमा महोत्सव के दौरान ही इन्हें तीन दिनों के लिए बाहर लाया जाता है। यही कारण है कि इस दुर्लभ और आध्यात्मिक घड़ी का साक्षी बनने के लिए भक्त वर्षभर उत्सुकता से इंतजार करते हैं।
देश-विदेश से पहुंचे लाखों श्रद्धालु
पादुका स्थापना के साथ ही धाम में प्रातःकाल से ही लंबी-लंबी कतारें लगनी शुरू हो गईं। क्या छोटे बच्चे, क्या युवा, बुजुर्ग, महिलाएं या पुरुष—हर वर्ग के श्रद्धालु बागेश्वर बालाजी के साथ संन्यासी बाबा की पादुकाओं के दर्शन कर भावविभोर नजर आए। मध्य प्रदेश और भारत के विभिन्न राज्यों के अलावा नेपाल और अन्य देशों से भी हजारों श्रद्धालु इस विशेष गुरु पूर्णिमा महोत्सव में भाग लेने पहुंचे हैं। पूरा बागेश्वर धाम क्षेत्र इस समय सनातन संस्कृति, श्रद्धा और अटूट आस्था के संगम से सराबोर दिख रहा है।






