Who is Nandan Nilekani: नई दिल्ली। NEET-UG परीक्षा में बड़े पैमाने पर हुए पेपर लीक, देशभर में छात्रों के भारी विरोध प्रदर्शन और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद उपजे अभूतपूर्व संकट के बीच केंद्र सरकार ने देश की परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह से बदलने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 जुलाई को घोषणा की कि देश के जटिल और कमजोर पड़ चुके नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के एग्जाम सिस्टम को पुनर्गठित करने की कमान दिग्गज टेक्नोलॉजिस्ट और आधार के मुख्य वास्तुकार नंदन नीलेकणी को सौंपी जा रही है। पिछले चार दशकों से भारत में जब भी किसी विशाल और चुनौतीपूर्ण ढांचे को शून्य से बनाने या सुधारने की जरूरत पड़ी है, तब देश ने नंदन नीलेकणी की ओर ही रुख किया है।
कौन हैं नंदन नीलेकणी? IITian से इंफोसिस और ‘आधार’ का सफर
1955 में बेंगलुरु में जन्मे नंदन नीलेकणी ने देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIT बॉम्बे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की।
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इंफोसिस की नींव: 1981 में उन्होंने एन.आर. नारायण मूर्ति और पांच अन्य साथियों के साथ मिलकर ‘इंफोसिस’ (Infosys) की शुरुआत की, जिसने भारत में सॉफ्टवेयर और आईटी क्रांति का चेहरा बदल दिया। नीलेकणी 2002 से 2007 तक इंफोसिस के सीईओ रहे।
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‘इमेजिनिंग इंडिया’ पुस्तक: 2008 में उन्होंने ‘इमेजिनिंग इंडिया’ पुस्तक लिखी, जिसने उन्हें एक कॉर्पोरेट लीडर से इतर देश के भविष्य का रोडमैप तैयार करने वाले नीतिशास्त्रज्ञ के रूप में पहचान दिलाई।
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आधार कार्ड का निर्माण: 2009 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के निमंत्रण पर उन्होंने कैबिनेट मंत्री का दर्जा संभालते हुए भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) की स्थापना की। उन्होंने दुनिया की सबसे बड़ी बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली ‘आधार’ बनाई, जिससे आज 100 करोड़ से ज्यादा भारतीय जुड़े हैं।
परोपकार और शिक्षा के क्षेत्र में नीलेकणी का योगदान
हेडलाइंस से हटकर नंदन नीलेकणी और उनकी पत्नी रोहिणी नीलेकणी अपनी संपत्ति का बड़ा हिस्सा समाज सेवा में दान करने के लिए जाने जाते हैं।
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गिविंग प्लेज: 2017 में इस दंपत्ति ने ‘गिविंग प्लेज’ पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत उन्होंने अपनी कुल संपत्ति का कम से कम आधा हिस्सा दान करने का संकल्प लिया।
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एकस्टेप (EkStep) पहल: 2014 में उन्होंने ‘एकस्टेप’ नामक नॉन-प्रॉफिट प्रोग्राम शुरू किया, जो ओपन टेक्नोलॉजी के जरिए बच्चों में बेसिक लिटरेसी (साक्षरता) और न्यूमरेसी (गणित) को बढ़ावा देता है। यानी जिस व्यक्ति को देश के एग्जाम सिस्टम को सुधारने का काम मिला है, वह पिछले एक दशक से प्राथमिक शिक्षा के सुधार पर जमीनी काम कर रहा है।
6 सदस्यीय हाई-लेवल टास्क फोर्स: टीम में शामिल हैं ये
नंदन नीलेकणी जिस टास्क फोर्स की अध्यक्षता कर रहे हैं, उसमें देश की शीर्ष प्रशासनिक, तकनीकी और सुरक्षा हस्तियों को शामिल किया गया है:
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नंदन नीलेकणी — अध्यक्ष (आईटी व टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ, पूर्व UIDAI चीफ)
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एस. सोमनाथ — पूर्व चेयरमैन, इसरो (ISRO)
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तपन डेका — पूर्व प्रमुख, इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB)
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प्रो. वी. कामाकोटी — निदेशक, आईआईटी मद्रास
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अनीता करवाल — पूर्व सेक्रेटरी, स्कूल शिक्षा विभाग
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अमृत लाल मीणा — वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी (IAS)
टास्क फोर्स के सामने क्या हैं मुख्य चुनौतियां?
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) हर साल NEET और JEE जैसी देश की सबसे बड़ी और संवेदनशील प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करती है, जिन पर लाखों युवाओं का भविष्य निर्भर करता है।
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साइबर व डेटा सिक्योरिटी: टेक्नोलॉजी और सख्त सिक्योरिटी प्रोटोकॉल के जरिए परीक्षा प्रणाली को इस तरह डिजाइन करना कि पेपर लीक और डिजिटल हेराफेरी नामुमकिन हो जाए।
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ह्यूमन इंटरफेस व पारदर्शिता: विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा सिस्टम की समस्या जितनी तकनीकी है, उतनी ही मानवीय भी है। इसलिए प्रशासनिक और इंसानी स्तर पर पारदर्शिता लाना सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी।
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छात्रों का भरोसा बहाल करना: इस पूरी कवायद का सबसे बड़ा मकसद देश के लाखों परेशान अभ्यर्थियों और उनके अभिभावकों के मन में परीक्षा प्रणाली के प्रति खोए हुए विश्वास को फिर से जगाना है।







