Tuesday, September 1, 2026
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Sagar News: सागर की बंजर जमीन से निकल रहा रहस्यमयी ‘खजाना’! मोतीनुमा मनकों की खोज में उमड़े ग्रामीण, 25 हजार रुपये तक में बिक रहा एक दाना; पुरातत्व विभाग भी जांच में जुटा

Sagar News: सागर। मध्य प्रदेश के सागर जिले से एक ऐसा रहस्यमयी मामला सामने आया है, जिसने ग्रामीणों से लेकर पुरातत्व विशेषज्ञों तक सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। जिले के जैतपुर डोमा गांव की बंजर जमीन इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। यहां मिट्टी की खुदाई के दौरान मोती जैसे दिखने वाले छोटे-छोटे मनके (Beads) निकल रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि इन मनकों की बाजार में हजारों रुपये कीमत मिल रही है और अब तक एक मनका 25 हजार रुपये में बिक चुका है।

इस अनोखी खोज के बाद गांव में मानो “खजाने की तलाश” शुरू हो गई है। हर दिन बड़ी संख्या में ग्रामीण फावड़े और कुदाल लेकर खेतों और बंजर जमीनों की खुदाई कर रहे हैं, ताकि उन्हें भी कोई कीमती मनका मिल सके।

मनकों की तलाश में जुटे ग्रामीण, हर कोई आजमा रहा किस्मत

Sagar News: जैसे ही गांव में जमीन से कीमती मनके निकलने की खबर फैली, पूरे इलाके में हलचल मच गई। अब ग्रामीण सुबह से शाम तक बंजर जमीन की खुदाई कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि अब तक करीब 10 लोगों को ऐसे मनके मिल चुके हैं।

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स्थानीय लोगों के मुताबिक, जैसे ही किसी व्यक्ति को मनका मिलता है, वैसे ही खरीददार मौके पर पहुंच जाते हैं। मनके का रंग, आकार, चमक और गुणवत्ता देखकर उसकी कीमत तय की जाती है और तुरंत खरीद लिया जाता है।

25 हजार रुपये तक में बिक चुका है एक मनका

Sagar News: ग्रामीणों का दावा है कि इन मनकों की मांग लगातार बढ़ रही है। अब तक कई मनके हजारों रुपये में बिक चुके हैं, जबकि एक दुर्लभ मनका करीब 25 हजार रुपये में खरीदा गया। यही वजह है कि आसपास के गांवों के लोग भी जैतपुर डोमा पहुंचकर खुदाई में जुट गए हैं।हालांकि, इन मनकों की वास्तविक कीमत और उनके असली स्वरूप की अभी तक किसी सरकारी एजेंसी ने पुष्टि नहीं की है।

500 साल पुरानी बस्ती के अवशेष होने की संभावना

मामले ने तूल पकड़ा तो सागर पुरातत्व विभाग भी सक्रिय हो गया। विभागाध्यक्ष प्रो. नागेश दुबे ने बताया कि शुरुआती अध्ययन में यह क्षेत्र ऐतिहासिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण प्रतीत होता है।उनके अनुसार, संभावना है कि लगभग 500 वर्ष पहले यहां कोई प्राचीन बस्ती आबाद रही हो। उस समय लोग रंग-बिरंगे मनकों से बने आभूषण पहनते थे। समय के साथ ये मनके मिट्टी में दब गए और अब बारिश, मिट्टी के कटाव तथा खुदाई के कारण बाहर निकल रहे हैं।

क्या मुगलकालीन आभूषणों का हिस्सा हैं ये मनके?

Sagar News:  ग्रामीणों का मानना है कि ये मनके मुगलकाल के समय उपयोग किए जाते थे। कुछ लोगों का दावा है कि ये किसी प्राचीन आभूषण का हिस्सा हैं, जबकि कुछ इन्हें मोती या बहुमूल्य रत्न मान रहे हैं।स्थानीय बुजुर्ग बताते हैं कि इससे पहले भी देवरी क्षेत्र में इसी प्रकार के मनके मिलने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

वैज्ञानिक जांच के बाद ही सामने आएगा असली सच

विशेषज्ञों का कहना है कि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि ये मनके वास्तव में कितने मूल्यवान हैं या किस कालखंड से जुड़े हुए हैं। इनके ऐतिहासिक और वैज्ञानिक महत्व का पता प्रयोगशाला परीक्षण और पुरातात्विक अध्ययन के बाद ही लगाया जा सकेगा।पुरातत्व विभाग अब इस पूरे क्षेत्र का सर्वे कराने की तैयारी में है। यदि यहां किसी प्राचीन बस्ती के प्रमाण मिलते हैं, तो यह स्थान ऐतिहासिक और पुरातात्विक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

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ग्रामीणों में उत्साह, विशेषज्ञों में जिज्ञासा

Sagar News: फिलहाल जैतपुर डोमा गांव की बंजर जमीन से निकल रहे इन रहस्यमयी मनकों ने पूरे सागर जिले में उत्सुकता का माहौल बना दिया है। जहां ग्रामीण इसे अपनी किस्मत बदलने वाला खजाना मान रहे हैं, वहीं विशेषज्ञ इसके पीछे छिपे इतिहास की परतें खोलने में जुट गए हैं।

अब सभी की निगाहें पुरातत्व विभाग की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि ये मोतीनुमा मनके वास्तव में कोई बहुमूल्य रत्न हैं, प्राचीन आभूषणों का हिस्सा हैं या फिर इतिहास की किसी भूली-बिसरी सभ्यता की अनमोल निशानी।

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