Bagbahara Paddy Scam: बागबाहरा (महासमुंद)। छत्तीसगढ़ सरकार की सबसे संवेदनशील और महत्वाकांक्षी धान खरीदी व्यवस्था में सेंध लगाकर लाखों रुपये की वित्तीय अनियमितता करने वाले शातिर आरोपियों के खिलाफ महासमुंद पुलिस ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। बागबाहरा थाना पुलिस ने धान उपार्जन केंद्र बाघामुड़ा में करीब 40.96 लाख रुपये के धान घोटाले के मामले में महीनों से फरार चल रहे मुख्य आरोपी और समिति प्रभारी को गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की है।
लगातार ठिकाने बदल रहे आरोपी को पकड़ने के लिए पुलिस ने साइबर सेल की मदद ली और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर उसे ग्राम मोखा से धर दबोचा।
भौतिक सत्यापन में खुली थी गबन की पोल
इस पूरे मामले का भंडाफोड़ तब हुआ जब मुनगासेर शाखा के प्रबंधक सेवकराम चंद्राकर ने उच्चाधिकारियों के निर्देश पर धान उपार्जन केंद्र बाघामुड़ा के स्टॉक का औचक निरीक्षण किया। ऑनलाइन रिकॉर्ड और जमीनी हकीकत के बीच के फासले ने अधिकारियों के होश उड़ा दिए:
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ऑनलाइन रिकॉर्ड के अनुसार स्टॉक: 1,25,878 कट्टा धान होना चाहिए था।
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भौतिक सत्यापन में मिला वास्तविक स्टॉक: केवल 1,22,574 कट्टा धान मौके पर मिला।
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गायब स्टॉक (अंतर): 3,304 कट्टा धान (यानी कुल 1,321.6 क्विंटल धान) उपार्जन केंद्र से गायब था।
शासन द्वारा निर्धारित धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से जब इस गायब स्टॉक का मूल्यांकन किया गया, तो कुल 40,96,960 रुपये (लगभग 41 लाख रुपये) की भारी-भरकम सरकारी राशि की वित्तीय अनियमितता और गबन उजागर हुआ।
बागबाहरा धान घोटाला: मामले से जुड़े मुख्य तथ्य
| विवरण का बिंदु | घोटाला और पुलिस कार्रवाई से जुड़े आंकड़े |
| संबंधित धान उपार्जन केंद्र | बाघामुड़ा उपार्जन केंद्र, मुनगासेर शाखा |
| मुख्य आरोपी (समिति प्रभारी) | प्रेमसिंह ध्रुव (निवासी ग्राम मोखा के पास से गिरफ्तारी) |
| कुल गायब धान की मात्रा | 3,304 कट्टा (1,321.6 क्विंटल) |
| समर्थन मूल्य दर | ₹ 3,100 प्रति क्विंटल |
| कुल घोटाला राशि | ₹ 40,96,960 |
| शिकायत की तिथि / जेल भेजने की तिथि | 24 जनवरी 2026 / 17 जुलाई 2026 |
सीडीआर और तकनीकी निगरानी से मिली कामयाबी
शाखा प्रबंधक सेवकराम चंद्राकर की लिखित शिकायत पर 24 जनवरी 2026 को बागबाहरा थाने में समिति प्रभारी प्रेमसिंह ध्रुव के खिलाफ आपराधिक विश्वासघात और गबन का मामला दर्ज किया गया था। एफआईआर दर्ज होने की भनक लगते ही आरोपी अपना मोबाइल बंद कर भूमिगत हो गया था।
पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर बागबाहरा पुलिस की एक विशेष टीम आरोपी की तलाश में जुटी थी। पुलिस ने पारंपरिक मुखबिर तंत्र के साथ-साथ वैज्ञानिक पद्धति का सहारा लिया। आरोपी के मोबाइल नंबर के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और उसके पुराने सहयोगियों के मोबाइल टावर लोकेशन का गहन तकनीकी विश्लेषण किया गया।
जैसे ही पुलिस को इनपुट मिला कि आरोपी लुक-छिपकर ग्राम मोखा में पनाह लिए हुए है, पुलिस टीम ने तत्काल घेराबंदी की और उसे रंगे हाथों दबोच लिया।
कोर्ट ने भेजा जेल, सह-आरोपियों की तलाश जारी
बागबाहरा पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार किए गए आरोपी प्रेमसिंह ध्रुव को आवश्यक कागजी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद 17 जुलाई 2026 को स्थानीय सक्षम न्यायालय के समक्ष पेश किया गया। कोर्ट ने मामले की गंभीरता और भारी-भरकम सरकारी राशि के गबन को देखते हुए आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर उसे न्यायिक हिरासत (जेल) में भेजने का आदेश जारी कर दिया।
पुलिस का आधिकारिक बयान:
“धान खरीदी में किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। समिति प्रभारी को जेल भेज दिया गया है, लेकिन मामले की विवेचना अभी बंद नहीं हुई है। पुलिस इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि उपार्जन केंद्र से इतनी बड़ी मात्रा में धान की हेराफेरी अकेले एक व्यक्ति द्वारा संभव नहीं है। इस घोटाले के पीछे परिवहनकर्ताओं, राइस मिलर्स या बैंक के किसी अन्य कर्मचारी की मिलीभगत तो नहीं थी, इसके हर पहलू की जांच की जा रही है। जल्द ही कुछ और नाम सामने आ सकते हैं।”
मुस्तैद कार्रवाई से बिचौलियों में हड़कंप
धान खरीदी सीजन में अक्सर इस तरह के शॉर्टेज और गबन के मामले सामने आते हैं, लेकिन बागबाहरा पुलिस द्वारा तकनीकी विश्लेषण का उपयोग कर आरोपी को सलाखों के पीछे भेजने से सहकारी समितियों और बिचौलियों के बीच एक कड़ा संदेश गया है। किसानों के पसीने की कमाई और सरकार के खजाने पर डाका डालने वाले ऐसे प्रबंधकों पर त्वरित और कठोर कानूनी कार्रवाई ही इस व्यवस्था को पारदर्शी बना सकती है।





