Sanjay Pathak High Court Apology: ‘गलती से कॉल हुआ था…’ जज को कॉल करने के मामले में बीजेपी विधायक संजय पाठक ने हाई कोर्ट से मांगी बिना शर्त माफी, फैसला सुरक्षित

VIKASH KHALKHO

Sanjay Pathak High Court Apology: जबलपुर/भोपाल। मध्य प्रदेश के विजयराघवगढ़ से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कद्दावर विधायक संजय पाठक बुधवार (15 जुलाई 2026) को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की मुख्यपीठ में व्यक्तिगत रूप से पेश हुए। संजय पाठक ने हाई कोर्ट के जज को मिस्ड कॉल करने के बहुचर्चित मामले में न्यायालय के समक्ष बिना शर्त माफी मांग ली है। उन्होंने दलील दी कि यह कॉल जानबूझकर नहीं किया गया था, बल्कि तकनीकी त्रुटिवश (गलती से) चला गया था।

मुकुल रोहतगी ने पैरवी में दी सुप्रीम कोर्ट की दलील

संजय पाठक की ओर से देश के वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने पैरवी की। उन्होंने अदालत में दलील देते हुए कहा कि विधायक संजय पाठक का न्यायपालिका को प्रभावित करने का कोई इरादा नहीं था। वह केवल एक सिंगल रिंग कॉल था जो गलती से लग गया था, जिसके बाद उन्होंने शिष्टाचार के नाते मैसेज भेजकर अपना परिचय (इंट्रोडक्शन) भी दिया था।

रोहतगी ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में एक वकील द्वारा जजों को ‘ज्यूडिशियल सर्वेंट’ कहने के बाद हुए हंगामे का उदाहरण देते हुए कहा कि उस गंभीर मामले में भी आपराधिक अवमानना (Criminal Contempt) की कार्रवाई नहीं की गई थी। अतः इस मानवीय भूल को स्वीकार करते हुए माफीनामा मंजूर किया जाए। हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है।

क्या है पूरा मामला?

यह विवाद 1 सितंबर 2025 को तब शुरू हुआ था, जब हाई कोर्ट के जस्टिस विशाल मिश्रा की अदालत में संजय पाठक के परिवार से जुड़ी कंपनी ‘यश लॉजिस्टिक्स’ के अवैध उत्खनन और टैक्स चोरी से जुड़े मामले की सुनवाई चल रही थी।

  • सुनवाई के दौरान जस्टिस मिश्रा ने ओपन कोर्ट में प्रकटीकरण किया था कि उक्त मामले से जुड़े एक विधायक ने उनसे व्यक्तिगत रूप से संपर्क करने की कोशिश की है।

  • न्यायिक शुचिता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए जस्टिस मिश्रा ने स्वयं को इस केस की सुनवाई से अलग (Recuse) कर लिया था।

याचिका दायर होने पर जारी हुआ था नोटिस

इस घटनाक्रम के बाद कटनी निवासी आशुतोष मनु दीक्षित ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर इसे न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप बताया था। हाई कोर्ट ने मामले को अत्यंत गंभीर मानते हुए टिप्पणी की थी कि प्रथम दृष्टया यह आपराधिक अवमानना का मामला बनता है, जिसके बाद विधायक संजय पाठक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। अब इस संवेदनशील मामले पर उच्च न्यायालय का अंतिम फैसला आना बाकी है।

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विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।
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