Chhattisgarh CAG Report Assembly: विधानसभा में कैग की रिपोर्ट पेश: छत्तीसगढ़ की आय और जीएसडीपी में बढ़ोतरी, पर बढ़ा कर्ज का बोझ

Chhattisgarh CAG Report Assembly: रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य की वित्तीय स्थिति पर महालेखाकार (CAG) ने वर्ष 2024-25 की अपनी ऑडिट रिपोर्ट विधानसभा में पेश कर दी है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य की राजस्व प्राप्तियों और सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) में अच्छी वृद्धि दर्ज की गई है, लेकिन साथ ही लोक ऋण और देनदारियों में भी बढ़ोतरी देखी गई है।

GSDP और राजस्व प्राप्तियों में रिकॉर्ड वृद्धि

कैग रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2024-25 में राज्य का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) बढ़कर 5.67 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 10.89 प्रतिशत अधिक है।

  • इसी अवधि में राज्य की राजस्व प्राप्तियों में 16.21% तथा राज्य के अपने राजस्व में 15.30% की बढ़ोतरी हुई है।

  • केंद्र सरकार से मिलने वाले अनुदानों पर राज्य की निर्भरता घटकर 11.86% रह गई है।

व्यय का ढांचा और सब्सिडी

वर्ष 2024-25 के दौरान राज्य का कुल व्यय 1.45 लाख करोड़ रुपये रहा। इसमें से बड़ा हिस्सा यानी 88.53% राजस्व व्यय में खर्च हुआ, जबकि पूंजीगत व्यय 20,054.62 करोड़ रुपये रहा। व्यय का मुख्य हिस्सा ऊर्जा, खाद्य और नागरिक आपूर्ति क्षेत्र में दी जाने वाली सब्सिडी में खर्च हुआ।

उधारी का 47% हिस्सा पुराने कर्ज चुकाने में खर्च

रिपोर्ट में बढ़ते कर्ज पर चिंता जताते हुए उल्लेख किया गया है कि राज्य का लोक ऋण बढ़कर 33,463 करोड़ रुपये हो गया है।

  • वर्ष 2024-25 के दौरान ली गई नई उधारी का 47 प्रतिशत हिस्सा केवल पुराने ऋणों को चुकाने (रीपेमेंट) में खर्च हो गया, जिसके चलते सिर्फ 53% राशि ही विकास कार्यों के लिए उपलब्ध हो पाई।

  • राजस्व प्राप्तियों के अनुपात में ब्याज भुगतान बढ़कर 7.44% हो गया है, जो बढ़ते आर्थिक दबाव का संकेत है।

  • हालांकि, राज्य का राजकोषीय घाटा कम होकर जीएसडीपी के 4.48% पर आ गया है (जो पिछले वर्ष 5.44% था) और कुल बकाया देनदारियां 15वें वित्त आयोग की सीमा के भीतर पाई गई हैं।

बजट प्रबंधन में खामियां और ऑफ-बजट देनदारियां

कैग ने राज्य के वित्तीय प्रबंधन में कुछ गंभीर अनियमितताओं और कमियों को भी उजागर किया है:

  1. शून्य खर्च: वर्ष 2024-25 में 25 नई योजनाओं के लिए 261.41 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया था, लेकिन इनमें से एक भी रुपया खर्च नहीं किया गया।

  2. अतिरिक्त व्यय: छह विनियोगों में 1,538.65 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्यय हुआ, जिसे नियमित करने की आवश्यकता जताई गई है।

  3. देनदारियां: मार्च 2025 तक राज्य पर 1.53 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बजटीय देनदारियां और 4,776.57 करोड़ रुपये की ऑफ-बजट देनदारियां दर्ज की गई हैं।

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