Raipur Central Jail Initiative: अब बिना जेल गए मिलेगी ‘जेल की रोटी’: रायपुर केंद्रीय जेल अगस्त से शुरू करेगी विशेष फूड पैकेट योजना

Raipur Central Jail Initiative:  रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी स्थित रायपुर केंद्रीय जेल प्रशासन अगस्त 2026 से एक अनोखी और जनोपयोगी पहल की शुरुआत करने जा रहा है। इस योजना के तहत अब आम नागरिकों को ‘जेल की रोटी’ खाने के लिए न तो जेल जाने की मजबूरी होगी और न ही किसी प्रशासनिक सिफारिश की जरूरत पड़ेगी। जेल प्रशासन ने आम लोगों के लिए ‘जेल की रोटी’ नाम से एक विशेष फूड पैकेट योजना तैयार की है। इस विशेष फूड पैकेट का मूल्य 275 रुपये निर्धारित किया गया है, जिसमें जेल के भीतर बंद सजायाफ्ता कैदियों के हाथों से तैयार शुद्ध एवं सात्विक भोजन परोसा जाएगा।

275 रुपये में मिलेगा पूरा भोजन, आस्था कैंटीन में होगी बुकिंग

जेल प्रबंधन द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस विशेष फूड पैकेट में रोटी, चावल, दाल, मौसमी सब्जी और अचार शामिल रहेगा। शुरुआत में प्रायोगिक तौर पर प्रतिदिन केवल 30 फूड पैकेट ही तैयार किए जाएंगे। इन पैकेटों को प्राप्त करने के लिए इच्छुक व्यक्तियों को रायपुर केंद्रीय जेल परिसर के बाहर संचालित ‘आस्था कैंटीन’ में पूर्व बुकिंग कराकर निर्धारित शुल्क जमा करना होगा। बुकिंग के उपरांत तय समय पर नागरिकों को गर्म और ताजा भोजन उपलब्ध करा दिया जाएगा।

‘जेल योग’ और ‘कारागार दोष’ से जुड़ी है धार्मिक-ज्योतिषीय मान्यता

जेल अधिकारियों के मुताबिक, समाज में लंबे समय से यह ज्योतिषीय धारणा और लोक मान्यता प्रचलित है कि जिन व्यक्तियों की जन्मपत्री या कुंडली में ‘जेल योग’ अथवा ‘कारागार दोष’ होता है, वे यदि कैदियों के हाथों बनी रोटी का सेवन करते हैं तो इस दोष का नकारात्मक प्रभाव कम हो जाता है। इसी धार्मिक व मानसिक विश्वास के कारण हर महीने बड़ी संख्या में लोग अधिकारियों और अपने परिचितों के माध्यम से जेल से रोटी मंगवाने का प्रयास करते थे। इस बढ़ती मांग को एक पारदर्शी और व्यवस्थित रूप देने के लिए ही जेल प्रशासन ने यह सर्वसुलभ योजना लागू करने का निर्णय लिया है।

कमाई का पूरा पैसा कैदियों के कल्याण और पुनर्वास पर होगा खर्च

छत्तीसगढ़ के जेल महानिदेशक (DG Jail) हिमांशु गुप्ता ने बताया कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य व्यावसायिक मुनाफा कमाना बिल्कुल नहीं है। फूड पैकेट की बिक्री से मिलने वाली पूरी आय का उपयोग बंदियों के कल्याण, स्वास्थ्य और उनके पुनर्वास से जुड़ी कल्याणकारी गतिविधियों पर किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जनता की ओर से सकारात्मक प्रतिसाद मिलता है, तो आगामी दिनों में प्रतिदिन बनाए जाने वाले फूड पैकेटों की संख्या में इजाफा किया जाएगा। वर्तमान में आस्था कैंटीन में अच्छे आचरण वाले कैदियों द्वारा समोसे, मूंग बड़े, जलेबी और नमकीन जैसे उत्पाद भी तैयार कर बेचे जाते हैं।

रिहाई के बाद कैदियों को मुख्यधारा से जोड़ने की कवायद

रायपुर समेत राज्य की अन्य जेलों में निरुद्ध कैदियों को केवल खाना पकाने तक सीमित नहीं रखा जा रहा है, बल्कि उन्हें अचार, पापड़, साबुन निर्माण, कारपेंट्री, कंप्यूटर संचालन और ब्यूटीशियन जैसे कई रोजगारपरक प्रशिक्षण भी दिए जा रहे हैं। इसका दूरगामी लक्ष्य यह है कि जब सजा पूरी कर कैदी जेल से बाहर आएं, तो वे समाज की मुख्यधारा में शामिल होकर सम्मानपूर्वक अपनी आजीविका चला सकें। गौरतलब है कि दिल्ली की तिहाड़ जेल के बेकरी प्रोडक्ट्स और तेलंगाना के ‘जेल टूरिज्म’ मॉडल की तर्ज पर छत्तीसगढ़ की ‘जेल की रोटी’ पहल भी देश भर में एक नजीर पेश कर रही है।

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