Bhopal ATS Action: भोपाल। देश विरोधी और संदिग्ध आतंकी गतिविधियों के नेटवर्क के खिलाफ चलाए जा रहे सघन विधिक अभियान के तहत मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से बड़ी खबर सामने आई है। आतंकवाद रोधी दस्ते (ATS) द्वारा गिरफ्तार किए गए संदिग्ध इजहार उल हक की पुलिस रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद सोमवार को उसे सक्षम विधिक अदालत में पेश किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने आरोपी को आगामी 14 दिनों के लिए न्यायिक हिरासत (जुडिशियल कस्टडी) में जेल भेजने का कड़ा विधिक आदेश जारी किया है। वर्तमान में सुरक्षा कारणों से आरोपी को भोपाल के उच्च सुरक्षा वाले कारागार में निरुद्ध किया गया है।
एटीएस ने नहीं मांगी और पुलिस रिमांड, चारों आरोपियों से आमने-सामने हुई पूछताछ
विधिक सूत्रों से प्राप्त आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस संवेदनशील मामले की गहराई से पड़ताल कर रही एटीएस की विशेष विधिक टीम ने अदालत से इजहार उल हक की आगे की पुलिस रिमांड नहीं मांगी। गौरतलब है कि इससे पहले एटीएस ने उसे अपनी कस्टडी में लेकर लंबी पूछताछ की थी। इस पूरे देशव्यापी नेटवर्क के तहत सुरक्षा एजेंसियों ने अलग-अलग चार राज्यों से चार मुख्य संदिग्धों को गिरफ्तार करने में विधिक सफलता हासिल की थी, जिनमें फरहाज, शाकिर, मनईम और इजहार उल हक शामिल हैं। रिमांड के दौरान इन चारों को आमने-सामने बैठाकर भी कड़ाई से विधिक कड़ियों को जोड़ा गया था।
चारों संदिग्ध भोपाल केंद्रीय जेल में बंद, जांच एजेंसियों ने जुटाए महत्वपूर्ण विधिक साक्ष्य
सुरक्षा एजेंसियों का विधिक दावा: देश की प्रमुख आंतरिक सुरक्षा और जांच एजेंसियों ने दावा किया है कि चारों आरोपियों से अलग-अलग और संयुक्त रूप से की गई पूछताछ के दौरान उनके अंतरराष्ट्रीय संपर्कों, स्लीपर सेल नेटवर्क और संदिग्ध फंडिंग कड़ियों से जुड़ी कई विधिक व महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल हुई हैं। वर्तमान में ये चारों संदिग्ध आरोपी भोपाल की केंद्रीय जेल में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच विधिक अभिरक्षा में बंद हैं। खुफिया और सुरक्षा एजेंसियां उनके डिजिटल पदचिह्नों (डिजिटल फुटप्रिंट्स) और सोशल मीडिया हैंडल्स की भी विधिक स्क्रूटनी कर रही हैं।
आगामी कानूनी कार्रवाई और चार्जशीट की विधिक तैयारियां तेज
इस हाई-प्रोफाइल मामले को लेकर देश की केंद्रीय एजेंसियां और मध्य प्रदेश पुलिस पूरी तरह सतर्कता बरत रही हैं। पकड़े गए आरोपियों के स्थानीय सहयोगियों और छिपने के ठिकानों पर भी विधिक नजर रखी जा रही है। एटीएस के विधिक विंग के अनुसार, पूछताछ में मिले इनपुट्स और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर बहुत जल्द न्यायालय के सम्मुख एक मजबूत विधिक चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल की जाएगी, ताकि देश की एकता और संप्रभुता को चुनौती देने वाले इन तत्वों के खिलाफ कठोरतम दंडात्मक कड़ियां सुनिश्चित की जा सकें।








