Ambikapur News: अंबिकापुर। सरगुजा जिला मुख्यालय अंबिकापुर में योजनाबद्ध तरीके से षड्यंत्र रचकर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी करने वाले एक बेहद शातिर अंतरराज्यीय ठग गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। सरगुजा पुलिस ने प्रार्थी को अपने जाल में फंसाकर लगभग तीन करोड़ सत्तासी लाख आठ हजार रुपये की मोटी रकम हड़पने वाले गिरोह के तीन मुख्य सदस्यों को गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की है। इस गिरोह ने पीड़ित को फर्जी नौकरी दिखाने और दुर्लभ रेडियो एक्टिव वस्तु की पैकिंग व उसे ऊंचे दामों पर बेचने का लालच देकर इस महाठगी को अंजाम दिया था। प्रार्थी की लिखित शिकायत के बाद गांधीनगर थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों को धरदबोचा और आवश्यक कागजी कार्रवाई के बाद उन्हें न्यायालय में पेश किया है।
दुर्लभ रेडियो एक्टिव वस्तु के नाम पर बुना ठगी का जाल
पुलिस से मिली प्राथमिक जानकारी के अनुसार, इस अंतरराज्यीय गिरोह के हौसले इतने बुलंद थे कि उन्होंने पीड़ित को झांसा देने के लिए एक बेहद अनोखी और तकनीकी स्क्रिप्ट तैयार की थी। आरोपियों ने प्रार्थी से संपर्क साधकर खुद को बड़ी कंपनियों से जुड़ा हुआ बताया। इसके बाद उन्होंने पीड़ित को एक फर्जी जॉब प्रोफाइल का ऑफर दिया, जो बेहद गोपनीय और उच्च भुगतान वाला प्रतीत हो रहा था। ठगों ने प्रार्थी को विश्वास में लेते हुए दावा किया कि उनके पास अंतरराष्ट्रीय बाजार में अत्यधिक मांग वाली एक बेहद दुर्लभ और बहुमूल्य ‘रेडियो एक्टिव’ वस्तु मौजूद है। उन्होंने पीड़ित को इस कथित रेडियो एक्टिव सामग्री की सुरक्षित पैकिंग करने और उसे आगे बड़े पैमाने पर बेचने के कारोबार में साझीदार बनाने का सुनहरा सपना दिखाया।
करोड़ों रुपये निवेश कराकर ऐंठी भारी-भरकम रकम
शातिर ठगों के झांसे और छलावे में आकर प्रार्थी उनकी बातों को पूरी तरह सच मान बैठा। इसके बाद आरोपियों ने अलग-अलग प्रक्रियाओं, सिक्योरिटी डिपॉजिट, सरकारी मंजूरी, केमिकल टेस्टिंग और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पैकिंग के नाम पर पीड़ित से किस्तों में मोटी रकम वसूलना शुरू कर दिया। प्रार्थी भी भारी मुनाफे और बड़ी नौकरी के लालच में आकर लगातार उनके बताए खातों में पैसे ट्रांसफर करता रहा। इस तरह आरोपियों ने पीड़ित के साथ विश्वासघात करते हुए कुल 3 करोड़ 87 लाख 8 हजार रुपये की भारी-भरकम राशि ऐंठ ली। जब प्रार्थी को न तो कोई नौकरी मिली और न ही उस कथित दुर्लभ वस्तु का कोई अता-पता चला, तब जाकर उसे अपने साथ हुई इस बड़ी धोखाधड़ी का अहसास हुआ।
पीड़ित की शिकायत पर गांधीनगर पुलिस का बड़ा एक्शन
ठगी का शिकार होने के बाद पीड़ित ने तुरंत सरगुजा पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई। प्रार्थी की शिकायत को बेहद गंभीरता से लेते हुए थाना गांधीनगर में आरोपियों के खिलाफ विभिन्न सुसंगत और कड़े कानूनी प्रावधानों के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ की गई। मामले की संवेदनशीलता और इतनी बड़ी रकम की ठगी को देखते हुए पुलिस की एक विशेष टीम का गठन किया गया। पुलिस टीम ने तकनीकी साक्ष्यों, मोबाइल लोकेशन और बैंक खातों के विवरण खंगालते हुए आरोपियों की घेराबंदी शुरू की। पुलिस की मुस्तैदी के कारण गिरोह के तीनों शातिर सदस्य कानून के शिकंजे से बच नहीं सके।
तेलंगाना और वाराणसी से जुड़े हैं ठगों के तार
गांधीनगर पुलिस की टीम ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए देश के अलग-अलग राज्यों में फैले इस गिरोह के तीन शातिर ठगों को गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए आरोपियों में डॉक्टर भल्ला रामकृष्ण शामिल है जो मूल रूप से तेलंगाना का रहने वाला है। इसके अलावा गिरोह के दो अन्य सक्रिय सदस्यों में संजय कुमार बिंद और बाबू लाल राजभर शामिल हैं, जो उत्तर प्रदेश के वाराणसी के निवासी हैं। पुलिस की शुरुआती पूछताछ में आरोपियों ने अपना गुनाह कबूल कर लिया है। सरगुजा पुलिस अब इस बात की भी गहनता से तफ्तीश कर रही है कि इस अंतरराज्यीय गिरोह ने छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों में अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है और ठगी की इस रकम का इस्तेमाल कहाँ किया गया है।









