BlackBuck Case: नई दिल्ली। बॉलीवुड के सुपरस्टार सलमान खान की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने फिल्म ‘काला हिरण: बैटल फॉर लीगेसी’ के निर्माताओं के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने इस बहुचर्चित मामले में शुक्रवार यानी बारह जून को हुई पहली सुनवाई के बाद फिल्म के मुख्य निर्माता अमित जानी और अन्य संबंधित पक्षों को औपचारिक नोटिस जारी कर दिया है। माननीय न्यायालय ने मेकर्स से इस पूरे विवाद पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा है। इस अदालती आदेश के बाद से फिल्म उद्योग और कानूनी गलियारों में हलचल काफी तेज हो गई है, क्योंकि यह मामला सीधे तौर पर एक बड़े अभिनेता के व्यक्तित्व अधिकारों से जुड़ा हुआ है।
पोस्टर और पहनावे में समानता पर वकीलों की दलीलें
दिल्ली हाईकोर्ट में सलमान खान की तरफ से पैरवी कर रहे प्रसिद्ध वकील निजाम पाशा ने अदालत के समक्ष कई महत्वपूर्ण और अकाट्य दलीलें पेश कीं। उन्होंने पीठ को बताया कि बीते उनतीस मई को प्रस्तावित फिल्म के निर्माताओं ने एक आधिकारिक पोस्टर जारी किया था। इस पोस्टर में मुख्य भूमिका निभा रहे व्यक्ति को हूबहू सलमान खान की तरह दिखाने का प्रयास किया गया है। इसके विपरीत उस कलाकार का पहनावा, हाव-भाव और यहां तक कि उसका ब्रेसलेट भी सलमान खान की सार्वजनिक छवि से पूरी तरह मेल खाता है। वकीलों का दावा है कि यह समानता महज एक इत्तेफाक नहीं बल्कि जानबूझकर किया गया कृत्य है।
बरी होने के बावजूद छवि के दुरुपयोग का गंभीर आरोप
सलमान खान के वकील ने अपनी दलीलों को आगे बढ़ाते हुए कोर्ट को बताया कि साल 1998 के काले हिरण शिकार मामले से जुड़ी कुल चार एफआईआर में से तीन में अभिनेता ससम्मान बरी हो चुके हैं। इसके बावजूद फिल्म निर्माता उनकी पुरानी पहचान और विवादित छवि का अनुचित इस्तेमाल कर व्यावसायिक लाभ कमाने के लिए फिल्म का निर्माण कर रहे हैं। याचिका में इसे अभिनेता के पर्सनल और पब्लिसिटी अधिकारों का सीधा उल्लंघन बताया गया है। वकीलों के अनुसार किसी भी व्यक्ति के जीवन के संवेदनशील पहलुओं पर उसकी बिना अनुमति के इस तरह का प्रोजेक्ट तैयार करना पूरी तरह से अनुचित और गैर-कानूनी है।
ट्रेलर रिलीज होने के बाद रोक लगाने की पुरजोर मांग
अदालत में सुनवाई के दौरान यह बात भी सामने आई कि शुक्रवार की सुबह ही फिल्म के निर्माताओं ने सोशल मीडिया पर इसका पहला आधिकारिक ट्रेलर भी जारी कर दिया है। इसके बाद से मीडिया और इंटरनेट पर रोजाना सलमान खान का नाम इस विवादित फिल्म के साथ जोड़कर दिखाया जा रहा है। इसी वजह से अभिनेता के कानूनी दल ने अदालत से फिल्म की रिलीज, उसके सिनेमाघरों में प्रदर्शन, डिजिटल स्ट्रीमिंग और सभी प्रकार के प्रचार-प्रसार पर तत्काल प्रभाव से अंतरिम रोक लगाने की पुरजोर मांग की है। हालांकि, फिल्म की रिलीज की कोई तारीख अभी तय नहीं हुई है, लेकिन अभिनेता इस पूरे प्रोजेक्ट पर स्थायी प्रतिबंध चाहते हैं।
एकतरफा आदेश देने से हाईकोर्ट का साफ इनकार
सलमान खान के वकीलों की तमाम दलीलें और आपत्तियां सुनने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने कानून के बुनियादी सिद्धांतों का हवाला देते हुए एकतरफा आदेश पारित करने से साफ इनकार कर दिया। माननीय न्यायालय ने कहा कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के तहत विपक्षी पक्ष को नोटिस जारी कर उनका पक्ष सुनना बेहद जरूरी है। अदालत बिना निर्माताओं की दलीलें सुने इस स्तर पर फिल्म पर कोई रोक नहीं लगा सकती है। इसी वजह से कोर्ट ने निर्माता अमित जानी और उनके सहयोगियों को नोटिस भेजकर अपना पक्ष रखने का समय दिया है।
अगली सुनवाई की तारीख तय, मेकर्स की बढ़ी मुश्किलें
दिल्ली हाईकोर्ट ने इस हाई-प्रोफाइल मामले की गंभीरता को देखते हुए अगली सुनवाई के लिए उन्नीस जून की तारीख मुकर्रर की है। तब तक के लिए फिल्म के निर्माताओं को अदालत के समक्ष अपना लिखित जवाब प्रस्तुत करना होगा। कानूनी जानकारों का मानना है कि यदि मेकर्स उन्नीस जून को कोर्ट को संतुष्ट नहीं कर पाते हैं, तो फिल्म के ट्रेलर और पूरे प्रोजेक्ट पर अस्थायी रोक लग सकती है। इसके विपरीत फिल्म के निर्माता अमित जानी की तरफ से अभी तक इस अदालती नोटिस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। बहरहाल, इस कानूनी दांव-पेंच ने पूरी फिल्म इंडस्ट्री का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।









