Monday, August 31, 2026
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Surguja High Voltage Drama: सरगुजा में विधायक बनाम अधिकारी: बीजेपी विधायक रामकुमार टोप्पो और नायब तहसीलदार के बीच सरेआम मारपीट

Surguja High Voltage Drama: सरगुजा। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के अंतर्गत आने वाले सीतापुर विधानसभा क्षेत्र में सत्ता के रौब और अफसरशाही के कथित कड़े घमंड के बीच एक ऐसा अभूतपूर्व और शर्मनाक संग्राम छिड़ गया है, जिसने समूचे राज्य के प्रशासनिक और राजनैतिक महकमे में कड़ा विधिक हड़कंप मचा दिया है। सीतापुर से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वर्तमान विधायक रामकुमार टोप्पो और उनके कस्टमाइज्ड समर्थकों पर राजापुर उप-तहसील के नायब तहसीलदार तुषार मानिक को सरेआम घेरकर पीटने, शासकीय मर्यादा तार-तार करने और उनके कपड़े फाड़ने का गंभीर विधिक आरोप लगा है। मामला इतना अधिक गरमा गया कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सीतापुर थाना पुलिस को आधी रात को दोनों ही पक्षों की लिखित शिकायतों पर एक-दूसरे के खिलाफ कड़ा काउंटर केस (FIR) दर्ज करना पड़ा है।

विवाद की कस्टमाइज्ड जड़: 14 मई से भटक रही थी विधायक की बहन; फाइल फेंकने का आरोप

इस अभूतपूर्व शासकीय और राजनैतिक विवाद की पूरी कस्टमाइज्ड कहानी जमीन के एक विधिक दस्तावेज से प्रारंभ होती है:

  • दफ्तरों के चक्कर: पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, विधायक रामकुमार टोप्पो की चचेरी बहन सीमा धनकी राजापुर उप-तहसील में अपनी जमीन के ‘शाख शोध पत्र’ की विधिक स्वीकृति के लिए विगत 14 मई 2026 से लगातार दफ्तर के चक्कर काट रही थीं। परिजनों का आरोप है कि कस्टमाइज्ड बाबू और नायब तहसीलदार तुषार मानिक उन्हें बेवजह परेशान कर रहे थे।

  • शासकीय बदसलूकी की विधिक शिकायत: बुधवार (27 मई 2026) को जब सीमा धनकी पुनः दफ्तर पहुंचीं और उन्होंने फाइल पर तुरंत विधिक हस्ताक्षर करने का अनुरोध किया, तो नायब तहसीलदार तुषार मानिक कथित रूप से कड़े गुस्से में आ गए। मृतका/पीड़िता सीमा का आरोप है कि अधिकारी ने उनकी विधिक फाइल को हवा में फेंक दिया और अपमानित करते हुए कहा— “तुम होती कौन हो हस्ताक्षर के लिए कहने वाली? जाकर मैनपाट में हस्ताक्षर करा लो।” इसके बाद उन्हें जबरन दफ्तर परिसर से बाहर फिंकवा दिया गया।

शाम को कड़ा विधिक प्रतिशोध: बीच-बचाव करने उतरे SDM ने बमुश्किल बचाई जान

बहन के साथ शासकीय दफ्तर में हुई इस कथित बेइज्जती और कड़े व्यवहार की सूचना जैसे ही विधायक रामकुमार टोप्पो तक पहुंची, राजनैतिक गलियारे में तनाव फैल गया:

  • दफ्तर से वापस तलब: शाम करीब 6 बजे विधायक टोप्पो ने सीतापुर मुख्यालय लौट चुके नायब तहसीलदार तुषार मानिक को फौरन राजापुर घटना स्थल पर वापस तलब किया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अधिकारी अकेले जाने के बजाय अपने अनुविभागीय दंडाधिकारी (SDM) फागेश सिन्हा के साथ कस्टमाइज्ड रूप से वहां पहुंचे।

  • सरेआम मारपीट का विधिक आरोप: नायब तहसीलदार तुषार मानिक द्वारा दर्ज कराई गई विधिक शिकायत के अनुसार, वहां पहुंचते ही विधायक के कड़े समर्थकों ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया। आरोप है कि खुद विधायक टोप्पो ने उन्हें कस्टमाइज्ड किनारे बुलाया, जिसके बाद उनके समर्थकों ने शासकीय कार्य में बाधा डालते हुए अधिकारी पर जानलेवा धावा बोल दिया, मारपीट की और शासकीय वर्दी/कपड़े फाड़ दिए। नौबत यहां तक आ पहुंची कि मौके पर मौजूद SDM फागेश सिन्हा को खुद अपनी गाड़ी चलाकर नायब तहसीलदार को भीड़ से रेस्क्यू (किडनैप/हमले से बचाना) कर वहां से भागना पड़ा।

सीतापुर थाने में रातभर विधिक गहमागहमी; दोनों पक्षों पर दर्ज हुआ मुकदमा

इस वीआईपी और प्रशासनिक भिड़ंत के बाद सीतापुर थाने को छावनी में तब्दील कर दिया गया था। पुलिस ने दोनों पक्षों के विधिक बयानों के आधार पर कड़े कानूनी कदम उठाए हैं:

पक्ष (शिकायतकर्ता) आरोपी पक्ष दर्ज विधिक धाराएं (BNS 2023) विवाद का मुख्य विधिक कारण
नायब तहसीलदार तुषार मानिक विधायक रामकुमार टोप्पो, यूसुफ, नाजिम राजा, पंकज गुप्ता व 10 समर्थक भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 221, 221(1), 132 और 191(2) शासकीय कार्य में कड़ा व्यवधान उत्पन्न करना, लोक सेवक पर हमला व मारपीट।
सीमा धनकी (विधायक की बहन) नायब तहसीलदार तुषार मानिक सुसंगत प्रतिरोधात्मक विधिक धाराएं महिला से शासकीय कार्य के दौरान अभद्रता, फाइल फेंकना और मानसिक प्रताड़ना।

सरगुजा कलेक्टर का दो टूक विधिक बयान; कानून हाथ में लेने की इजाजत किसी को नहीं

मामले की कस्टमाइज्ड संवेदनशीलता और शासन-प्रशासन के बीच बढ़ते विधिक गतिरोध को देखते हुए सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत ने तत्काल मोर्चा संभालते हुए पूरे घटनाक्रम की प्रशासनिक फॉरेंसिक समीक्षा की है।

कलेक्टर अजीत वसंत का प्रशासनिक रुख: “राजापुर उप-तहसील की घटना विधिक और प्रशासनिक रूप से अत्यंत गंभीर है। SDM फागेश सिन्हा और पीड़ित नायब तहसीलदार से पूरे घटनाक्रम की आधिकारिक कस्टमाइज्ड रिपोर्ट तलब की गई है। चूंकि दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर गंभीर चोट और दुर्व्यवहार के आरोप लगाए हैं, इसलिए पुलिस प्रशासन द्वारा निष्पक्ष रूप से काउंटर केस दर्ज कर लिया गया है। कानून से ऊपर कोई नहीं है, पूरी तरह से फॉरेंसिक और विधिक साक्ष्यों के आधार पर दंडात्मक विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”

इस घटना के बाद समूचे सरगुजा संभाग में शासकीय कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच कड़ा शीतयुद्ध प्रारंभ हो गया है, जिसने वीआईपी संस्कृति और लोक सेवकों के आचरण की विधिक सीमाओं पर एक बार फिर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।

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